चमगादड़ों में होते हैं घातक वायरस, जो फैलाते हैं इबोला, सार्स और कोरोना जैसी महामारियां
] शमीम अंसारी बाराबंकी: एसएम न्यूज24टाइम्स
वर्षों से की जा रही है चमगादड़ों पर रिसर्च, 2013 में सामने आई थी कोरोना वायरस की थ्योरी
नई दिल्ली । कोरोना वायरस की उत्पत्ति और सवालों के बीच इसके वाहक बने चमगादड़ों पर कई देशों में रिसर्च चल रही है। चीन में ऐसी ही रिसर्च जनवरी में उस वक्त की गई थी, जब वुहान समेत पूरे देश में कोरोना वायरस के मामले हजारों में पहुंच चुके थे। यह खोज यूनान प्रांत में मौजूद चूना पत्थर की गुफाओं में की गई थी। इस खोज को अमेरिका की गैर लाभकारी संस्था इको-हेल्थ एलाइंस ने अंजाम दिया था। इस रिसर्च के दौरान वैज्ञानिक यहां से चमगादड़ों के जालों, थूक और खून समेत कई तरह के नमूने एकत्रित किए। इस दौरान वैज्ञानिकों का दल विशेष सुरक्षा सूट पहने हुए था। आपको बता दें कि इको-हेल्थ एलाइंस नए घातक वायरसों की पहचान करने और बचाव करने में मदद करता है। इको-हेल्थ एलांइस के अध्यक्ष और वैज्ञानिक पीटर दासजाक इससे पहले भी इस तरह की खोज कर चुके हैं।
आपको बता दें कि पूरी दुनिया में चमगादड़ों से सृजित करीब 500 घातक वायरस खोजे जा चुके हैं। वर्ष 2003 और वर्ष 2004 में भी इस तरह के घातक वायरस की खोज की गई थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक खोजे गए घातक वायरस और दुनिया के लिए समस्या बना नोवेल कोरोना वायरस इनसे करीब 96 फीसदी तक मेल खाता है। खुद पीटर ही बीते 10 वर्षों में 20 से ज्यादा देशों में खतरनाक वायरस की खोज कर चुके हैं। इन वैज्ञानिकों के लिए खोज का माध्यम केवल चमगादड़ ही नहीं बनते हैं बल्कि दूसरे जानवर भी होते हैं। जहां तक चमगादड़ों की बात है तो आपको यहां पर यह भी बता देते हैं कि अब तक हुई रिसर्च में यह बात काफी सामने आई है कि चमगादड़ों के जरिए ही यह वायरस पहले चीन में और फिर पूरी दुनिया में फैला है।
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