अब लगता है कि बिन सलमान की युद्ध की भूख ठंडी पड़ गई हैः न्यूयार्क टाइम्ज़
समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ
यमन की लड़ाई को पांच साल बीत चुके हैं और अब हालात ऐसे हो गए हैं कि सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान अपने यमन एजेंडे से ख़ुद को अलग कर रहे हैं। हालिया हफ़्तों में यही नज़र आया कि बिन सलमान ने यमन के मामले से दूरी बना ली है।
बिन सलमान ने कोरोना वायरस की महामारी का एक अच्छा बहाना देखकर एकपक्षीय रूप से युद्ध विराम की घोषणा कर दी। हालांकि संघर्ष विराम सफल नहीं हो पाया है मगर यह साफ़ लगने लगा है कि बिन सलमान को *अपने आलोचकों की इस बात में दम नज़र आने लगा है कि यमन युद्ध वह कभी नहीं जीत पाएंगे। न्यूयार्क टाइम्ज़ ने वरिष्ठ पत्रकार डेकलन वाल्श का एक लेख प्रकाशित किया है जिसमें लेखक का कहना है कि इस समय दक्षिणी यमन के अदन शहर, वहां की बंदरगाह और सेंट्रल बैंक पर अंतरिम परिषद नामक संगठन ने क़ब्ज़ा कर लिया है जिसे सऊदी अरब और इमारात का एलायंस सपोर्ट कर रहा था। अब सऊदी अरब और इमारात दोनों ही अपनी आंतरिक समस्याओं को देखते हुए यमन के विवाद से पीछा छुड़ाने की कोशिश में हैं। इस स्थिति का नतीजा यह है कि यमन के उन संगठनों में आपसी लड़ाई शुरू हो गई है जो सऊदी अरब और इमारात की मदद से यमन की सेना और अंसारुल्लाह आंदोलन से लड़ रहे थे। अंसारुल्लाह आंदोलन का उत्तरी यमन पर नियंत्रण है और वह बहुत मज़बूत पोज़ीशन में है।
यह सब कुछ उस समय हो रहा है जब भुखमरी का शिकार यमन के लिए अंतर्राष्ट्रीय फ़ंडिंग बहुत कठिन काम है क्योंकि सारे ही देश कोरोना वायरस की महामारी से लड़ने में व्यस्त हैं। दक्षिणी इलाक़ों में अंतरिम परिषद नामक संगठन ने अपने शासन का एलान कर दिया है जिसके बाद अब सऊदी अरब और इमारात द्वारा समर्थित यमनी संगठनों के बीच आपसी झड़पों की आशंका बढ़ गई है। यानी युद्ध के भीतर नया युद्ध शुरू होने जा रहा है।
अब लगता है कि बिन सलमान की युद्ध की भूख ठंडी पड़ गई है। चारों तरफ़ से सऊदी अरब की निंदा हो रही है क्योंकि उसके हमलों में हज़ारों की संख्या में यमनी आम नागरिक मारे गए हैं। दूसरी ओर तेल की क़ीमतों में भारी गिरावट ने सऊदी अरब को गंभीर आर्थिक संकट में फंसा दिया है।

