यूट्यूब पत्रकारों की बढ़ती संख्या से खबरों की गुणवत्ता प्रभावित

मामून अंसारी जैदपुर बाराबंकी

पत्रकार बनने के लिए मर्यादित भाषा व पत्रकारिता में पेशेवर नैतिकता जरूरी

बाराबंकी। वर्तमान दौर में जहां शहर के कुछ चुनिंदा यूट्यूबर अपने को पत्रकार समझने लगे हैं, जिनको न बोलने का हुनर है और न बैठन-उठने का सलीका, फिर भी जहां देखों वहां बिना बुलाये जाते हैं पहुंच और अपने आपको खास दिखाने के चक्कर में नैतिकता की हदे पार करते हुए खबरों की छीछालेदर कर देते हैं, जिस कारण कोई प्रतिष्ठित अखबार अपने पेपर में ऐसी खबरों को अपने अखबार में नहीं प्रकाशित करता है। कथित यूट्यूबर की आवाज नक्कार खाने की तूती बनकर रह जाती है, उन्हीं लोगों को ऐसी खबरे पसंद होती हैं जो उनके ही भांति ज़लील होते हैं। ऐसे में सोचने वाली बात यह है कि अगर ऐसे ही अच्छी खबरों का बुरी तरह पोस्टमार्टम होता रहेगा तो किसी न किसी उनका अंतिम संस्कार भी होना लाजिमी है। कुछ कथित यूट्यूबर अपने साथ चलती फिरती अटैची लेकर दौड़ते हैं जो देखने में मूकबधिर नजर आता है, लेकिन मौके-मौके पर अपने आका की जी हुजूरी अवश्य करता हुआ नजर आता है। ऐसे हालात में अच्छे छवि के लोग अपनी खबरों को ऐसे चैनलों से बचाते हुए नजर आते हैं और दबी जुबान कहते हैं कि भईया! फलाने को हमारी खबर न चलाये तो ज्यादा सही है, उसको कुछ लोगों का चाटुकार ही रहने दो, लेकिन फिर भी वह दूसरे दिन समाचार पत्रों की कटिंग का हवाला देकर अपनी मर्जी से खबर चला जरूर देता है। लोगों में चर्चाएं है कि कुछ छुटभैया नेता और ठेकेदार की गोदी में खेलने वाला निष्पक्ष ख़बर नहीं परोस सकता, वह सिर्फ उन्हीं चार पांच लोगों के इर्द गिर्द घूमकर जीवन की गाड़ी चलाकर गली गली घूम रहा है, भला हो अटैची का जो उसका साथ साए की तरह दे रही है।

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