सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार का एक बड़ा खेल उजागर……

अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी

बाराबंकी। प्रदेश की राजधानी की नाक के नीचे सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार का एक बड़ा खेल उजागर हुआ है। बाराबंकी जनपद में संचालित ‘टेक होम राशन’ (THR) प्लांटों में करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। ताज्जुब की बात यह है कि प्रधानमंत्री की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक को धता बताते हुए, सरकारी अधिकारी और प्रबंधक स्वयं सहायता समूहों की गरीब महिलाओं का अधिकार छीनकर अपनी जेबें भर रहे हैं।

जांच में खुली पोल: जितेंद्र और अन्य पाए गए दोषी
हाल ही में हुई आधिकारिक जांच की रिपोर्ट (संख्या 4697/841) के अनुसार, मसौली THR यूनिट में स्टॉक और वित्तीय अभिलेखों में भारी हेराफेरी पाई गई है। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से ब्लॉक मिशन प्रबंधक (BMM) जितेंद्र पटेल , ममता वर्मा बैंक सखी उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक शाखा उधौली, (THR ) की पदाधिकारी (अध्यक्ष) और अन्य संबंधितों को वित्तीय अनियमितताओं और गबन का दोषी पाया गया है।
अकेले एक इकाई की जांच में करीब 17,45,746.80 रुपये के गबन का खुलासा हुआ है। इसमें सोया ऑयल, चना दाल, मूंगफली और खाली टिन/स्क्रैप की बिक्री में लाखों रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया है।
आठों प्लांट भ्रष्टाचार की भेंट, तत्कालीन उपायुक्त की भूमिका संदिग्ध
सूत्रों और प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह भ्रष्टाचार केवल एक प्लांट तक सीमित नहीं है। जनपद के सभी आठ THR प्लांटों में यही खेल चल रहा है। इन प्लांटों का संचालन तत्कालीन उपायुक्त स्वतः रोजगार के संरक्षण में किया जा रहा था। आरोप है कि उर्मिला सिंह (DMM) जिला मिशन प्रबंधक और तत्कालीन उपायुक्त की मिलीभगत से इस पूरे सिंडिकेट को चलाया गया।
*भ्रष्टाचार के मुख्य बिंदु:*
* 7-8 साल से एक ही जगह तैनाती: जनपद में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी होने का मुख्य कारण जिला मिशन प्रबंधक और ब्लॉक मिशन प्रबंधकों की विगत 7-8 वर्षों से एक ही स्थान पर तैनाती है। लंबे समय तक एक ही पद पर जमे रहने के कारण इन अधिकारियों ने भ्रष्टाचार का अभेद्य किला बना लिया है।
*90 करोड़ की भारी धनराशि का अता-पता नहीं:* प्रत्येक प्लांट के लिए समूहों से ली गई 90 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि अभी तक समूहों को नहीं लौटाई गई है।
*जानबूझकर दिखाया जा रहा घाटा:* साल-दर-साल प्लांटों को घाटे में दिखाकर महिलाओं को लाभांश से वंचित रखा जा रहा है, जबकि कागजों पर सामान की खरीद और बिक्री में भारी अंतर है।
* *ऑडिट रिपोर्ट की अनदेखी:* THR की ऑडिट रिपोर्ट में भारी वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होने के बावजूद अब तक कोई कठोर दंडात्मक कार्यवाही नहीं हुई है, जिससे सरकार की मंशा पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
गरीब महिलाओं से छल
स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने लिखित बयानों में बताया है कि उनका मानदेय कई महीनों से नहीं दिया गया है, और मानदेय के नाम पर उनसे अवैध वसूली भी की जाती है। महिलाओं का कहना है कि प्रधानमंत्री जी का सपना है कि महिलाएं आत्मनिर्भर बनें, लेकिन यहाँ के भ्रष्ट अधिकारी उन्हें और अधिक गरीबी के दलदल में धकेल रहे हैं।
*निष्कर्ष:* बाराबंकी का यह घोटाला तो मात्र एक बानगी है। यदि सभी आठ प्लांटों की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो यह आंकड़ा सौ करोड़ के पार जा सकता है। अब देखना यह है कि राजधानी के इतने करीब हो रहे इस संगठित भ्रष्टाचार पर शासन क्या कड़ा कदम उठाता है।

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