पत्रकारिता को दलाली का धंधा बनाने वालों पर शिकंजा, फर्जी खबरों की धमकी देकर वसूली करने वाला पूरा ‘पत्रकार गैंग’ गिरफ्तार
अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी
बाराबंकी।लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कही जाने वाली पत्रकारिता को अवैध कमाई और भयादोहन का जरिया बना चुके फर्जी पत्रकारों पर आखिरकार कानून का डंडा चला। न्यूज पोर्टल और सोशल मीडिया पर भ्रामक व फर्जी खबरें चलाने की धमकी देकर ग्राम प्रधानों, कोटेदारों और अधिकारियों से मोटी रकम वसूलने वाले चार तथाकथित पत्रकारों को सफदरगंज पुलिस ने औलिया लालपुर गौशाला के पास से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
जानकारी के अनुसार ये कथित पत्रकार औलिया लालपुर ग्राम प्रधान से गौशाला के नाम पर वसूली करने पहुंचे थे। प्रधान द्वारा विरोध किए जाने पर इन्होंने रौब दिखाते हुए गौशाला की कमियां “न्यूज चैनल” पर चलाने की धमकी दी और खबर न रोकने के एवज में एक लाख रुपये की मांग की। पिछले एक पखवारे से ये लोग खुद को टीवी चैनल का पत्रकार बताकर व्यापारियों की दुकानों की वीडियोग्राफी कर डर का माहौल बना रहे थे।
पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इन लोगों ने गोंडा, बाराबंकी समेत कई जनपदों में तथाकथित पत्रकारों का संगठित गैंग बना रखा है, जो ब्लैकमेलिंग और अवैध वसूली का धंधा चला रहा है। मंगलवार को महिला पत्रकार रूबी अवस्थी, विशाल गुप्ता, मनीष कुमार उर्फ सम्राट और आशीष मिश्रा एक बार फिर गौश्रय स्थल पहुंचकर एक लाख रुपये की मांग करने लगे। ग्राम प्रधान की सूचना पर मौके पर पहुंचे थानाध्यक्ष अमर कुमार चौरसिया व पुलिस टीम ने जब इनसे पत्रकारिता से जुड़ा कोई प्रमाण मांगा, तो चारों बगलें झांकते नजर आए।
पुलिस ने इनके कब्जे से पांच मोबाइल फोन और एक कार बरामद की, जिनका इस्तेमाल ये लोग भौकाल बनाने और डराने के लिए करते थे। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक अभियुक्त विशाल गुप्ता और मनीष कुमार पहले से गैंगस्टर के अभियुक्त हैं, जबकि विशाल गुप्ता गोंडा जनपद का हिस्ट्रीशीटर अपराधी भी है।
सूत्रों के अनुसार विशाल गुप्ता और रूबी अवस्थी का ऐसा आचरण पहली बार सामने नहीं आया है। इनके खिलाफ पहले भी कई थानों में शिकायतें दी जा चुकी हैं। पत्रकारिता की आड़ में प्रधानों, ठेकेदारों और जनप्रतिनिधियों से अवैध वसूली करना इनकी पुरानी आदत रही है। कई बार भीड़ के हत्थे चढ़कर पिटाई तक खा चुके हैं, लेकिन सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर हर बार बच निकलते रहे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे फर्जी पत्रकार न सिर्फ समाज को गुमराह करते हैं, बल्कि ईमानदार पत्रकारिता की साख पर भी दाग लगाते हैं। जनता ने मांग की है कि इस तरह पत्रकारिता को दलाली और वसूली का जरिया बनाने वालों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में कोई भी लोकतंत्र के इस स्तंभ को बदनाम करने की हिम्मत न कर सके।

