योद्धा महाराणा प्रताप की 480वीं जयंती पर किये गये याद
रियाज वारसी संवाददाता थाना क्षेत्र देवा बाराबंकी
बाराबंकी। देवां क्षेत्र में महाराणा प्रताप इन्टर कॉलेज बरेठी में महान योद्धा महाराणा प्रताप सिंह की 480वीं जयंती पर सामाजिक दूरी की व्यवस्था कर पुष्पांजलि का आयोजन किया गया। प्रथम पुष्पांजलि अर्पित करते हुए खण्ड शिक्षा अधिकारी देवां आलोक कुमार सिंह एवम् थानाध्यक्ष देवा कोतवाली प्रमोद कुमार सिंह ने महाराणा प्रताप सिंह सिसोदिया एवम् मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर खण्ड शिक्षा अधिकारी ने कहा कि महाराणा प्रताप भारत के सबसे पहले स्वतंत्रता सेनानी माने जाते है जिनकी वीरता विश्व विख्यात हैद्य इन्होंने मातृभूमि की स्वतंत्रता, सम्प्रभुता और आन बान शान के लिए मुगल बादशाह अकबर से जीवन की अंतिम सांस तक युद्ध करते रहे जंगलों में घास की रोटी खाना स्वीकार किया आक्रान्ताओं से रोटी बेटी का सम्बंध बनाना स्वीकार नही किया। इसलिए इतिहास के पन्नों में महाराणा प्रताप की वीरता और स्वाभिमान हमेशा के लिए अमर हो गयीद्य आज महाराणा प्रताप करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा के स्त्रोत हैं। थानाध्यक्ष देवा, प्रमोद कुमार सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप का कद साढ़े सात फुट एंव उनका वजन 110 किलोग्राम थाद्य उनके सुरक्षा कवच का वजन 72 किलोग्राम और भाले का वजन 80 किलो था। कवच, भाला, ढाल और तलवार आदि को मिलाये तो वे युद्ध में 200 किलोग्राम से भी ज्यादा वजन उठाए लड़ते थेद्य आज भी महाराणा प्रताप का कवच, तलवार आदि वस्तुएं उदयपुर राजघराने के संग्रहालय में सुरक्षित रखे हुए है। समाजसेवी राघवेंद्र प्रताप सिंह ने इस मौके पर विचार व्यक्त करते हुए कहा किअकबर ने महाराणा प्रताप के समक्ष प्रस्ताव रखा था यदि आप मेरी अधीनता को स्वीकार करेंगे तो हिंदुस्तान की आधी सत्ता महाराणा प्रताप को दे दी जाएगी लेकिन महाराणा प्रताप ने उनके इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इस मौके पर उमेश चन्द्र शास्त्री, आर पी सिंह, धर्म कुमार यादव, विकास सिंह, विसेन, विवेक यादव आदि उपस्थित रहे।
रियाज वारसी संवाददाता थाना क्षेत्र देवा बाराबंकी

