जैदपुर की आरा मशीनों में गूलर जैसे प्रतिबंधित पेड़ों का जखीरा वन विभाग बेखबर
अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी
बाराबंकी – जैदपुर कस्बे और आसपास की आरा मशीनों पर प्रतिबंधित हरे पेड़ों की अवैध कटान और भंडारण का खेल खुलेआम चल रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी सब जानते हुए भी आंखें मूंदे बैठे हैं।
*– गूलर, पाकड़, नीम जैसे प्रतिबंधित पेड़ों के लट्ठे भरे पड़े –*
जैदपुर क्षेत्र की कई आरा मशीनों पर गूलर, पाकड़, नीम जैसे प्रतिबंधित प्रजाति के हरे पेड़ों के लट्ठे बड़ी संख्या में डंप हैं। वन अधिनियम के तहत इन पेड़ों की कटान पर पूरी तरह रोक है। बावजूद इसके रात के अंधेरे में पेड़ काटकर आरा मशीनों पर पहुंचाए जा रहे हैं।
*– स्थानीय अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान, मिलीभगत का आरोप –*
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार वन विभाग के स्थानीय अधिकारियों को सूचना दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। लोगों ने आरा मशीन संचालकों और विभागीय कर्मियों की मिलीभगत का आरोप लगाया है। दिनदहाड़े ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से हरे पेड़ों के गिल्टे लाए जा रहे हैं।
*– पर्यावरण को भारी नुकसान, ग्रामीणों में आक्रोश –*
गूलर और पाकड़ जैसे पेड़ पर्यावरण और भूजल स्तर के लिए बेहद जरूरी हैं। इनकी अंधाधुंध कटाई से क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ रहा है। पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
*– उच्च अधिकारियों से जांच और सख्त कार्रवाई की मांग –*
स्थानीय लोगों ने बाराबंकी वन विभाग डीएफओ और उच्च अधिकारियों से जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग को जल्द से जल्द हरे पेड़ों की सुरक्षा के लिए कोई बड़ा कदम उठाना चाहिए नहीं तो आने वाले समय में लोगों को ऊपर पर्यावरण का खतरा और भी संकट में डाल सकता है।
*– क्या कहते हैं नियम –*
वन संरक्षण अधिनियम के तहत गूलर, पाकड़, पीपल, बरगद जैसे पेड़ों को बिना अनुमति काटना दंडनीय अपराध है। दोषी पाए जाने पर सख्त से सख्त कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

