जरीफनगर के दयोरा शेखपुर में कार्रवाई से मचा हड़कंप, जांच में सूचना निकली झूठी; पुलिस टीम की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
बदायूं। जिले के थाना जरीफनगर क्षेत्र के गांव दयोरा शेखपुर में अफीम होने की सूचना पर की गई पुलिस की दबिश अब पुलिस विभाग के लिए ही भारी पड़ गई। जांच में सूचना झूठी पाए जाने के बाद पुलिस अधीक्षक ग्रामीण की रिपोर्ट के आधार पर एक उपनिरीक्षक समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
बताया जा रहा है कि गांव में दो पक्षों के बीच मारपीट के बाद मुकदमा दर्ज हुआ था। इसी विवाद के बीच आरोपी पक्ष द्वारा कथित तौर पर दूसरे पक्ष को फंसाने के उद्देश्य से उसके घर में अफीम रखे होने की सूचना पुलिस को दी गई। सूचना को गंभीरता से लेते हुए उपनिरीक्षक मनीष भारद्वाज ने पुलिस टीम के साथ वादी के घर दबिश दे दी।
दबिश के बाद जब पूरे मामले की जांच हुई तो अफीम संबंधी सूचना गलत पाई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने जांच कराई और एसआई मनीष भारद्वाज समेत पांच पुलिसकर्मियों पर निलंबन की कार्रवाई की गई।
निलंबित पुलिसकर्मियों में एसआई मनीष भारद्वाज, सिपाही हरीश, सुरजीत, संदीप भाटी और कांस्टेबल लोकेश के नाम सामने आए हैं। पुलिस अधीक्षक ग्रामीण की रिपोर्ट के आधार पर हुई इस कार्रवाई को विभागीय स्तर पर गंभीर माना जा रहा है।
झूठी सूचना देने वाले पक्ष पर कार्रवाई कब
इस पूरे प्रकरण में एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि जांच में अफीम की सूचना झूठी साबित हुई है और किसी पक्ष द्वारा दूसरे पक्ष को फंसाने के लिए गलत सूचना दी गई थी, तो झूठी सूचना देने वालों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी? फिलहाल इस पक्ष पर कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि गंभीर आरोपों से जुड़ी किसी भी सूचना पर कार्रवाई से पहले उसकी विश्वसनीयता और तथ्यों की पर्याप्त पड़ताल कितनी जरूरी है। वहीं, पांच पुलिसकर्मियों के निलंबन से साफ है कि अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया है।
*मुकीम अहमद अंसारी ब्यूरो चीफ एसएम न्युज 24 टाइम्स बदायूं*

