आशा बहू बना दबंग युवक प्रशासन मौन ? कवरेज करने गये पत्रकार से की अभद्रता दे डाली फर्जी मुकदमा दिखाने की धमकी। पत्रकारों में आक्रोश
सद्दाम हुसैन संवाददाता जिला श्रावस्ती
श्रावस्ती उत्तर प्रदेश। एक तरफ जहां प्रदेश सरकार ने ग्रामीण महिलाओं के लिए हर गांव में एक आशा बहू का चयन किया हुआ है जो ग्रामीण महिलाओं को गर्भ के समय उनको जानकारी दें समय-समय पर उनके टीका लगाना या अस्पताल पहुंचाना एवं डॉक्टर की सलाह देने का काम करना होता है इस काम के लिए सरकार ने शादीशुदा महिलाओं को चयनित किया है पर क्या आपको पता है जनपद श्रावस्ती में यह काम एक नौजवान युवक कर रहा है कारण है कि जिस आशा बहू का चयन किया गया है वह अनपढ़ है और जालसाजी करके फर्जी डिग्री लगाकर नौकरी हथिया ली है और घर में बैठे रहती है और क्षेत्र का सारा काम अपने नौजवान युवक से कराती हैं ग्रामीणों ने कई बार युवक को समझाया वह ना आए और अपनी मम्मी को भेजें बहुत सी बातें महिलाएं पुरुषों से नहीं कर सकती। तो वो अपनी राजनीतिक पहुंच दिखाकर अकड़ जाता है और कहता है कि हमारे तालुकात बड़े नेताओं से हैं हमारी मम्मी नौकरी का आधा पैसा अधिकारियों को देती हैं हमारा कुछ नहीं कर पाओगे और ज्यादा बोला तो तुमको किसी फर्जी में बाद में फंस देंगे गांव वाले डर जाते हैं मामला जनपद श्रावस्ती के तहसील भिनगा ग्राम सेमरा बौरिया कुण्डी, थाना सिरसिया जनपद श्रावस्ती का है सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सगीर अहमद उर्फ गुड्डू पुत्र शमीम अहमद निवासी ग्राम सेमरा, जो मनचला व आवारा किस्म का युवक है देर सबेर काफी रात तक गांव में घूमा करता है और महिलाओं से खुले लफ्जों में कहता है कि ……..लगा लिया करो काहे कितने बच्चे पैदा करते हो हमारी मम्मी चल नहीं पाती हैं हमको आना पड़ता है। जब एक ग्रामीण ने मना किया तो युवक आग बबूला हो गया और जान से मारने की धमकी देता है और कहता है कि मेरी मा आशा बहू है और वह कभी कार्य करने नहीं आएगी और उनकी जगह मैं जाता हूँ। कोई भी कुछ नहीं कर सकता है हमारी पहुंच बहुत ऊपर तक है। और हमको जो पूछना होगा पूछेंगे बताना बताओ नहीं तो तुम को सरकार से मिलने वाली सहायता नहीं दिलाएंगे इसी बात को लेकर गांव में कुछ लोगों से विवाद चल रहा था तो वहां के स्थानीय पत्रकार मो0 सद्दाम ने खबर को कवरेज किया तो विपक्षी ने कहा तुम्हारे जैसे पत्रकार मेरे घर रोज आते हैं और ज्यादा बोला तो तुमको भी किसी मुकदमे पता दूंगा लगता है कि वर्तमान समय में अब पत्रकारिता करना आसान नहीं है, मामला थाने तक पहुंचा पुलिस ने दोनों पार्टी व्यक्तियों ने चालन कर मामले को शांत कर दिया पर सवाल यह उठता है कि जब कोई दबंग असामाजिक किस्म के व्यक्ति पत्रकारों पर उंगली उठाता है तो प्रशासन पत्रकारों के साथ नहीं बल्कि अपराधियों के साथ खड़ा दिखाई देता है।
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