राष्ट्रपति शी जिनपिंग की नीतियों की आलोचना पड़ी भारी, प्रोफेसर को गंवाना पड़ा पद
समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ
बीजिंग । चीन की कम्युनिस्ट सरकार की नीतियों की आलोचना अपराध की श्रेणी में आता है फिर भले ही वो न्यायसंगत न हो। ताजा मामला चीन की प्रतिष्ठित सिंघुआ यूनिवर्सिटी का जहां कानून के प्रोफेसर जू झानग्रेन को केवल इसलिए बर्खास्त कर दिया है, क्योंकि उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग की नीतियों की आलोचना की थी।
जू झानग्रेन उन चुनिंदा चीनी शिक्षाविदों में से एक हैं, जिन्होंने जिनपिंग की गलत नीतियों की खुलकर आलोचना की। इस संबंध में पुलिस ने उन्हें हिरासत में भी लिया था और करीब छह दिनों बाद उन्हें रिहा किया गया। प्रोफेसर ने कार्रवाई की परवाह न करते हुए कहा था, ‘कोरोना महामारी ने चीनी शासन के सड़े हुए सिस्टम को उजागर कर दिया है। मैं अभी यह बता सकता हूं कि इसके लिए मुझे दंड दिया जाएगा। संभव है ये मेरे आखिरी शब्द भी हो सकते हैं। मैंने राष्ट्रपति के खिलाफ बोलने की हिम्मत की है, जो सरकार की नजरों में अपराध के समान है’।
यूनिवर्सिटी ने औपचारिक रूप से प्रोफेसर को हटाये जाने की सूचना दी। जू झानग्रेन 2018 में एकदम से सुर्खियों में आये थे जब उन्होंने शी जिनपिंग की आलोचना की थी। तब उन्हें चेतावनी देते हुए निलंबित कर दिया गया था, लेकिन प्रोफेसर सरकार के गलत निर्णयों और नीतियों के खिलाफ मुखर रहे।
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