उर्दू के मशहूर शायर राहत इंदौरी अब नहीं रहे, दो गज़ ही सही पर मेरी मिल्कियत तो है – ए मौत तूने मुझे ज़मींदार कर दिया
शमीम अंसारी बाराबंकी: एसएम न्यूज24टाइम्स .
उर्दू के मशहूर शायर राहत इंदौरी का 11 अगस्त की शाम इंदौर के ऑरबिंदो अस्पताल में निधन हो गया।
कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट पॉज़िटिव आने के बाद, 10 अगस्त को देर रात गए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।अस्पताल में भर्ती होने के बाद, 70 वर्षीय राहत इंदौरी ने ख़ुद ट्वीट करके कोरोना रिपोर्ट पॉज़िटिव आने की ख़बर दी थी।
कोविड के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर कल मेरा कोरोना टेस्ट किया गया, जिसकी रिपोर्ट पॉज़िटिव आई है। ऑरबिंदो हॉस्पिटल में एडमिट हूं, दुआ कीजिये जल्द से जल्द इस बीमारी को हरा दूं। एक और इल्तेजा है, मुझे या घर के लोगों को फ़ोन ना करें, मेरी ख़ैरियत ट्विटर और फ़ेसबुक पर आपको मिलती रहेगी।
राहत इंदौरी, इस दौर के ऊर्दू के सबसे वरिष्ठ शायरों में से एक थे। उनकी शायरी का डंका केवल भारत या पाकिस्तान में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में बजता था। बड़े से बड़े और संवेदनशील विषयों को भी आसान ज़बान और अपने मुनफ़रिद अंदाज़ में लोगों तक पहुंचाने के कारण, विभिन्न धर्मों के मानने वाले युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता बहुत ज़्यादा रही है।
उनकी मनमोहक और क्रांतिकारी नज़्में, सुनने वाले के दिल की गहराईयों तक उतर जाती थीं और लोग मुहावरों के तौर पर भी उनके शेरों का इस्तेमाल करने लगे थे।
लगेगी आग तो आएंगे घर कई ज़द में
यहां पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़े है
मैं जानता हूं कि दुश्मन भी कम नहीं लेकिन
हमारी तरह हथेली पे जान थोड़े है
हमारे मुंह से जो निकले वही सदाक़त है
हमारे मुंह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़े है
जो आज साहिब-इ-मसनद हैं कल नहीं होंगे
किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़े है
सभी का ख़ून है शामिल यहां की मिट्टी में
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है
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