साईकिल यात्रा व पद यात्रा के माध्यम से विरोध प्रदर्शन
मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)
राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी के निर्देशानुसार विधानसभा जैदपुर के अन्तर्गत किसान विरोधी अध्यादेश के खिलाफ जिला पंचायत सदस्य इं कृष्ण कुमार रावत जी ने साईकिल यात्रा व पद यात्रा के माध्यम से विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा की इस अध्यादेश की वजह से किसानों को न्याय मिलना बहुत मुश्किल हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि छोटे किसानों को फसल बेचकर जल्दी पैसों की जरूरत होती है, तो ऐसे में वह मजबूरन कम दाम में फसल बेचेगा। तो किसान बडी बडी कम्पनियों के आगे कैसे टिक पायेगा ? क्योंकि केंद्र सरकार के इस अध्यादेश से सबसे बड़ा खतरा यह है कि जब फसलें तैयार होंगी, उस समय बड़ी-बड़ी कम्पनियां जानबूझ कर किसानों के माल का दाम गिरा देंगी और उसे बड़ी मात्रा में स्टोर कर लेंगी जिसे वे बाद में ऊंचे दामों पर ग्राहकों को बेचेंगी। कानून के अनुसार APMC मंडियों का कंट्रोल किसानों के पास होना चाहिए लेकिन वहां भी व्यापारियों ने गिरोह बना के किसानों को लूटना शुरू कर दिया है।
अब नए अध्यादेश के जरिये सरकार किसानों के माल की MSP पर खरीद की अपनी ज़िम्मेदारी व जवाबदेही से पूरी तरह से पल्ला झाड़ना चाहती है।यहां सबसे महत्वपूर्ण एक सवाल यह है कि जब किसानों के उपज की खरीद निश्चित स्थानों पर नहीं होगी तो सरकार इस बात की गणना कैसे कर पायेगी कि किसानों के माल की खरीद MSP पर हो रही है या नहीं ?
यह हम भी मानते हैं कि देश में वर्तमान में कृषि उपज मंडी व्यवस्था में भारी सुधार की आवश्यकता है। एक अनुमान के मुताबिक अभी तक 30% किसान ही मंडी तक अपनी फसल को ले जा पाते हैं। बाकी किसान इससे बाहर बेच देते हैं। तो क्यों न अब सरकार को लक्ष्य रखना चाहिए कि देश भर में किसी भी गांव से 5 किलोमीटर के अंदर एक कृषि उपज मंडी हो। मंडी प्रांगण में आधुनिक कोल्ड स्टोरेज,आधुनिक तौल काँटे, बड़े वेयरहाऊस हों, बड़ा प्रांगड़ हो, किसान सभा ग्रह हो, किसानों की फसल के लिए MSP खरीद ग्यारंटी कानून हो,
अब इस नए अध्यादेश के तहत आलू, प्याज़, दलहन, तिलहन व तेल के भंडारण पर लगी रोक को हटा लिया गया है। अब समझने की बात यह है कि हमारे देश में 85% लघु किसान हैं, किसानों के पास लंबे समय तक भंडारण की व्यवस्था नहीं होती है। वैसे भी किसान के पास वर्तमान में आय बहुत कम है छोटा किसान हो या बड़ा किसान हो वह अपनी उपज को ज्यादा दिन तक रोकने में सक्षम नहीं है क्योंकि किसान को फसल कटाई के बाद जल्द पैसों की आवश्यकता होती है।
यहां देखने वाली सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है की किसान अपनी उपज को कितने भी दिन तक भंडारण करके इसके पहले भी रख सकता था जो कानूनी रोक थी वो सिर्फ बड़ी कंपनियों और व्यापारियों के भंडारण करने पर थी सिर्फ उसे हटाया गया है तो यह कैसा किसान हितैषी फैसला हुआ ? इससे तो सिर्फ धन्ना सेठो को कालाबाजारी करने का पूरा पूरा मौका मिला है कालाबाजारी करने का कानूनी अधिकार मिला है। यानी यह अध्यादेश बड़ी कम्पनियों द्वारा कृषि उत्पादों की कालाबाज़ारी के लिए लाया गया है, ये कम्पनियाँ और सुपर मार्केट अपने बड़े-बड़े गोदामों में कृषि उत्पादों का भंडारण करेंगे और बाद में ऊंचे दामों पर ग्राहकों को बेचेंगे। इससे किसान तो बुरी तरह प्रभावित होगा ही पर देश का आम उपभोक्ता भी बार बार मंहगाई का शिकार होगा।
किसान फसल बोनी से एक महीना पहले से असमंजस में रहता है कि कौनसी फसल की बोनी करे तो वह अक्सर जिस फसल के दाम अधिक होते हैं उसे चुन लेता है। सोचिए बड़े उद्योगपतियों द्वारा अतिरिक्त भंडारण की गई फसल के बोनी के समय रेट ज्यादा रहेंगे तो किसान महंगी फसल को बोयेगा। लेकिन किसान की फसल बोने के 4 से 5 महीना बाद मार्केट में आएगी तब तक बड़े व्यापारी अपनी स्टॉक की हुई फसल को फिर से मार्केट में निकालेंगे। इससे किसान की फसल आते तक फिर दाम बहुत ज्यादा गिर जाएंगे। ऐसे में किसान का फिर से शोषण होगा।
सरकार का किसानों के प्रति रवैया बहुत ही खराब होता जा रहा है
उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को बढ़ावा दिया जाएगा जिसमें बड़ी-बड़ी कम्पनियाँ खेती करेंगी और किसान उसमें सिर्फ मजदूरी करेंगे। इस नए अध्यादेश के तहत किसान अपनी ही जमीन पर मजदूर बन के रह जायेगा। इस अध्यादेश के जरिये केंद्र सरकार कृषि का पश्चिमी मॉडल हमारे किसानों पर थोपना चाहती है।
कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के तहत फसलों की बुआई से पहले कम्पनियां किसानों का माल एक निश्चित मूल्य पर खरीदने का वादा करती हैं लेकिन
इस एक्ट में यह गारंटी नहीं है कि किसान का माल कंपनी पूरा खरीदेगी। फिर इसमें सवाल यही उठता है कि किसान मेहनत से 100 केला उगाएगा और कंपनी उसके 25 केले को खराब या छोटा बताकर रिजेक्ट कर देगी तो वह किसान कहाँ बेंचेगे
भंडारण और कालाबाजारी का कानूनी अधिकार व्यापारी और कंपनियों को मिला है।
किसान के लिए इन अध्यादेशों में कुछ भी नहीं है तो हम प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री जी से हम सभी किसानों कि तरफ बताना चाहते है कि इन अध्यादेशो को आप किसान हितेषी बताकर प्रचार प्रसार ना करें और किसान को इतना नासमझ न समझें।
क्या सरकार के पास नीति, नियत और प्रतिभा का अभाव हो चला है ?
क्या एनपीआर,एनआरसी के बहाने डाटा जासूसी हो रही है ?
रेल, जहाज, स्कूल, अस्पताल के बाद अब जंगलो , खेतों का भी निजीकरण करवाओगे
इस अवसर पर विरोध प्रदर्शन में मौजूद रहे पवन वर्मा प्रधान संघ महामंत्री,अजय शुक्ला, राजेश यादव,संजय यादव, चंद्रेश यादव, रवीश वर्मा,शिव दयाल,उमा यादव,नन्हा प्रजापति,डा महानंद, दीनदयाल, जतिन रावत,पुत्तन रावत, ललित रावत, सोनू रावत आदि,,,मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)
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