कुरआन मजीद एक ज़िन्दा हक़ीक़त है इसका जितना खुलासा होता है जानने की ख्वाहिश और बढती है – मौलाना सै . मुशाहिद आलम मिटा दो ज़ुल्म जहां में जहां जहां भी मिले , मेरे खयाल से येभी है इन्तेक़ामे हुसैन  

नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)7268941211

ज़ुल्म का एक दिन खातमा  होगा ,हक़ का सर बलंद होगा ।अल्लाह के घर देर है अंधेर नहीं

अपने अंदर ज़ुल्म व तशद्दुद को जगह ना दें – मौलाना जाबिर जौरासी 

वाक़ई हक़ के तरफदार सुलेमानी थे ,दुश्मनो से भी खबरदार सुलेमानी थे -हाजी सरवर अली कर्बलाई

बाराबंकी  । कुरआन मजीद एक ज़िन्दा हक़ीक़त है इसका जितना खुलासा होता है जानने की ख्वाहिश और बढती है ।यह बात मौलाना गुलाम अस्करी हाल में यादे शोहदा व मज्लिसे बरसी के मौक़े पर मौलाना सै.मुशाहिदआलम रिज़वी साहब ने कही ।उन्होनें ये भी कहा है कि मक़सद की राह में हक़ को समझते हुये अपनी जिन्दगी को खर्च कर देना जिहाद है । अगर कोई किसी को नुक़सान पहुंचा रहा है तो उसका रिश्ता इस्लाम  व मोमिनियत से नहीं हो सकता । सच्चा मोमिन व मुस्लिम जबान से भी नुक़सान नहीं पहुँचा सकता । कामयाबी चाहिये तो पहले अपने नफ्स से जिहाद करो ।मौलाना जाबिर जौरासी ने सदारती तास्सुरात पेश करते हुए कहा कि अपने अंदर ज़ुल्म व तशद्दुद को जगह ना दें ।ज़ुल्म का एक दिन खातमा  होगा , हक़ का सर बलंद होगा । अल्लाह के घर देर है अंधेर नहीं ।मौलाना सिराज अहमद व मौलाना इब्ने अब्बास ने भी  अपने तास्सुरात पेश करते हुये कहा कि अल्लाह से  मोहब्बत करने वाले मोहम्मद  स.अ.व. की इत्तेबा करते है । एहतेराम किरदार का होता है, जो राहे हक़ व राहे हुसैन में अपने को क़ुर्बान करता है ,उसके ज़िक्र की ज़िम्मेदारी परवरदिगार लेता है ।रहबर की पैरवी और मज़लूम की हिमायत करने वाले की कामयाबी क़दम चूमती है ।आखिर में ज़नाबे फातिमा ज़हरा के मसायब पेश किये जिसे सुन कर सभी रो पड़े । मजलिस से पहले अजमल किन्तूरी ने खिराजे अक़ीदा पेश करते हुए पढ़ा  – आशिक़े हैदर की इस तरह शहादत देखकर ,हर बशर क़ासिम सुलेमानी नज़र आने लगा ।डा 0 मुहिब रिज़वी ने  कुछ इस तरह खिराजे अक़ीदत पेश करते हुए कहा कि,इस जहां में  ये फज़ीलत कम नहीं तेरे लिये ।अपने रहबर के लिये तू मालिके अस्तर बना।क़ूवते ईमां ज़मीं पर जब मुजस्सम  हो गई।तब कहीं क़ासिम सुलेमानी तेरा पैकर बना ।हाजी सरवर अली कर्बलाई ने अपना बेहत रीन कलाम पेश किया वाक़ई  हक़ के तरफ़दार सुलेमानी थे,दुश्मनों से भी खबरदार सुलेमानी थे ।नज़रों में उनके सदा रहते थे रहबर सरवर , अपने रहबर के  वफादार सुले मानी थे।निज़ामत के फरायेज़ अंजाम देते हुये मौलाना सै 0 मो 0 महदी रिजवी ने मजलिस का आगाज़ तिलावते कलाम ए पाक से किया और दिलों का सरदार हिन्दी तर्जुमा में तक्सीम कराई ।बानिये मजलिस ने  सभी का शुक्रिया अदा किया ।नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)7268941211

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