बज्म-ए ग्यास की तरही नशिस्त का हुआ आयोजित

मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)9044641489

बाराबंकी। शहर के मोहल्ला पीर बटावन में स्थित मदरसा इस्लामिया में बज्म-ए ग्यास की तरही नशिस्त का आयोजन किया गया। नशिस्त की अध्यक्षता शऊर कामिल एडवोकेट ने की। संचालन डॉक्टर रेहान अलवी बाराबंकवी ने किया। चैधरी वकार, अख्तर जमाल उस्मानी, अहमद इमरान और तारिक जिलानी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। नशिस्त प्रारंभ होने से पूर्व साहित्य क्षेत्र में योगदान देने के लिए रेहान बाराबंकवी को करवान ए इंसानियत की जानिब से मोमेंटो देकर और शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। नशिस्त में शायरों ने एक से बढ़कर एक कलाम प्रस्तुत किए। उस्मान मीनाई ने पढ़ा एक दश्त की जमीन है और दूसरा हूं मैं, बाकी कहीं पे तशना दहानी नहीं रही,, रेहान बाराबंकवी ने पढ़ा मेरा बुरा जो चाहते उनके भी वास्ते, रेहान मेरे दिल में बुराई नहीं रही,, फैज आतिश ने पढ़ा-सागर भी आज चुप है सुराही नहीं रही,तेरे बगैर शाम सुहानी नहीं रही,, आदर्श बाराबंकवी ने कहा-पीकर शराब कहने लगा एक शराबी यूं,दारू की कैफियत भी यकीनी नहीं रही,, नफीस बाराबंकवी ने पढ़ा-बचपन के साथ-साथ जवानी नहीं रही,कोई भी शै बदन पे पुरानी नहीं रही,,शाद बड़ेलवी ने कहा-बच्चों का पेट भरती रही मां तो रोज रोज, कानों में उसके सोने की बाली नहीं रही,, कारी मकबूल अहमद ने पढ़ा-बुनियाद रेत पर बनी पक्की नहीं रही,जैसे कि बात झूठे की सच्ची नहीं रही,, इनके अतिरिक्त वकार बाराबंकवी और इरफान बाराबंकवी ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। इस अवसर पर शहाबुद्दीन अहमद, जियाउल हसन,अनस किदवई, उमैर अहमद, मुईद अहमद और चैधरी शोएब वगैरह मौजूद थे।

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