खादी का रिश्ता हमारे इतिहास और परंपरा से है: गोप निकली आत्मनिर्भर भारत यात्रा, कई दलों के नेता हुए सम्मिलित
मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)9044641489
बाराबंकी। चरखा आर्थिक तकलीफ दूर करने का कुदरती तरीका है। जो शोषण से मुक्ति का रास्ता भी है। इंसानियत की सेवा ही नहीं बल्कि उत्पादन और वितरण का विकेन्द्रीकरण करने का विचार भी है। यह गांव को बचाने और आत्मनिर्भर बनाने का जरिया भी है। यह बात गांधी भवन में आचार्य जे.बी. कृपलानी की पुण्यतिथि पर आयोजित व्याख्यानमाला के मुख्य वक्ता गांधीवादी राजनाथ शर्मा ने कही।
इससे पहले श्री गांधी आश्रम शताब्दी वर्ष के अन्र्तगत आयोजित आत्मनिर्भर भारत यात्रा के तीसरे चरण की यात्रा फजलुर्रहमान पार्क से गांधी भवन तक निकाली गई। जिसमें विभिन्न राजनैतिक दलों के अलावा अधिवक्ता, प्रबुद्धजन, शिक्षक व छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। खादी, स्वदेशी और स्वावलम्बन की थीम पर आधारित यात्रा को पूर्व मंत्री अरविन्द कुमार सिंह गोप ने तिरंगा झण्डा दिखाकर रवाना किया। श्री गोप ने कहा कि खादी का रिश्ता हमारे इतिहास और परंपरा से है। महात्मा गांधी ने आत्मनिर्भर भारत के स्वप्न को सम्पूर्ण स्वदेशी से जोड़ा था। इस आंदोलन से राजनाथ शर्मा ने खादी को पुर्नजीवित करने का काम किया। लोकतंत्र सेनानी कल्याण समिति के संयोजक धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव ने कहा कि महात्मा गांधी ने चरखा चलाकर आत्मनिर्भरता से देश को जोड़ा था। गांधी जी के लिये चरखा अपनाना अहिंसा, हिन्दू-मुस्लिम एकता, छुआछूत खात्मा, स्त्री सम्मान के लिये जरुरी शर्त रहा है। लोकतंत्र सेनानी एवं वरिष्ठ पत्रकार अनिल त्रिपाठी ने कहा कि आचार्य कृपलानी चरखा और खादी अपनाने पर न सिर्फ जोर देते थे बल्कि इसे एकता के लिये जरुरी मानते थे। चरखे में बड़ी ताकत है। वह ताकत अहिंसा की ताकत है। हमने चरखा चलाया, परन्तु उसे अपनाया नहीं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष मो. मोहसिन ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत यात्रा एक ऐसा अवसर है, जब हम इस बात का मूल्यांकन कर सकते हैं कि स्वाधीनता के बाद की सात दशक की यात्रा में हमने क्या खोया और क्या पाया है। गांधी जी के लिए चरखा देश की स्वाधीनता के साथ स्वावलम्बन का भी मंत्र और यंत्र दोनों था। पूर्व प्रशासनिक अधिकारी नरेश नारायण अवस्थी ने कहा कि आज गांधी जी को याद करने का मतलब है उस चरखे की तलाश जिसके इस्तेमाल से अहिंसा और एका की ताकत मिलती हो, गैर बराबारियां दूर होती हों। क्योंकि गांधी जी के लिये चरखा, अहिंसा, स्वराज एकता की रुहानी ताकत थी। उनके चरखा दर्शन को जिंदगी में उतारना पड़ेगा। सभा की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ समाजसेवी हाजी मो. उमेर किदवई ने कहा कि आज जो हालत है, वह होने वाली नहीं थी। अगर हमें अहिंसक शक्ति बढ़ानी है तो फिर से चरखे को अपनाना होगा और उसका पूरा अर्थ समझना होगा। आज भी उस चरखे में अपार शक्ति भरी है। यात्रा के दौरान संयोजक राजनाथ शर्मा का अरविन्द कुमार सिंह गोप, समाजसेवी मनीष खेतान, अनवर महबूब किदवई, शहजादे आलम वारसी सहित कई लोगो ने जगह-जगह माला पहनाकर स्वागत किया। इस मौके पर सिटी इं. कालेज के प्रधानाचार्य विजय प्रताप सिंह, जिला बार एसोसिएशन के महामंत्री नरेश कुमार सिंह, एडवोकेट भारत सिंह यादव, मृत्युंजय शर्मा, विनय कुमार सिंह, पाटेश्वरी प्रसाद, संजीव सोनकर, सोनू यादव, हुमायूं नईम खान, धनंजय शर्मा, मनीष सिंह, गौरी यादव, शिवशंकर शुक्ला, दानिश सिद्दीकी, रंजय शर्मा, सरदार राजा सिंह, डा अनिल वर्मा, कौशल किशोर त्रिपाठी, हसनैन हैदर, सत्यवान वर्मा, अंकुर मिश्रा, लवकुश शरण आनंद, अनिल यादव, मो तौफीक अहमद सहित कई लोग मौजूद रहे।
मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)9044641489

