कड़क प्रियंका रावत के सामने अधिकारियों की कांपती थी रूह!
फिलहाल अपनी सत्ता में माननीयों की दयनीय हालत पर भाजपाई चकित?जनता हतप्रभ!
कृष्ण कुमार द्विवेदी (राजू भैया)
बाराबंकी। ..साहब जो कहें वही सही। यह फार्मूला भाजपा की सत्ता में आज जिले में भले ही चल रहा हो? लेकिन भाजपाइयों एवं अन्य लोगों का मानना है कि पूर्व सांसद प्रियंका रावत के होते यह तो फिलहाल न हो पाता।कई मौकों पर सत्ता पक्ष के माननीयों की हालत दयनीय नजर आती है? जिसे देख भाजपाई भी चकित रह जाते हैं। चर्चा होती है कि तब भगवाधारी बोल उठते हैं काश आज जिले की कमान पूर्व सांसद के हाथों में होती तब बेअंकुश नौकरशाही पर जलवे से प्रियंका रावत का डंका बजता नजर आता?
बाराबंकी जनपद में अब तक हुए सांसदों में अपनी तेज तर्रार कार्यशैली के लिए चर्चित रहीं पूर्व सांसद एवं भाजपा की प्रदेश महामंत्री प्रियंका रावत की याद अब भाजपाइयों को ही नहीं आम लोगों को भी आ रही हैं! क्योंकि पूर्व के बीते समय में सांसद रहते हुए तानाशाह नौकरशाही पर कैसे नकेल कसी जाती है इसके कई उदाहरण श्रीमती रावत ने डंके के साथ प्रस्तुत किये थे। आज सिरौलीगौसपुर के ग्राम तासीपुर में एक गरीब ब्राह्मण संदीप शुक्ला इलाज के अभाव में अपनी पांच माह की बेटी नित्या को खोने के बाद न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। शुक्ला अपने आपको भाजपाई भी बताते हैं? लेकिन हालात बद से बदतर हैं। टीन शेड व छप्परों के महल में रहने वाले संदीप के घर में जब उनकी बेटी तख्त से गिरी। और उसकी इलाज के अभाव में मौत हुई! तो नदीदे नौकरशाहों ने उनके घर में कागजी छत तैयार करवा डाली? खूब हंगामा हुआ।
सत्ता की किरकिरी होते देख मौके पर भाजपा नेता पूर्व विधायक सुन्दरलाल दीक्षित, सांसद उपेन्द्र रावत, विधायक शरद अवस्थी सहित अन्य नेता भी पहुंचे। भाजपा नेता सिद्धार्थ अवस्थी ने भी आवाज उठायी। विपक्ष के नेताओं में पूर्व मंत्री अरविन्द सिंह गोप, एमएलसी राजेश यादव, पूर्व मंत्री राकेश वर्मा ,कांग्रेस नेता तनुज पुनिया जैसे कई अन्य दिग्गज भी वहां गये। इतनी सियासी कयावद व दिनों के बाद शासन ने मौके पर अनुपस्थित सिद्ध हो चुके डाॅ0 अनिल श्रीवास्तव से बस स्पष्टीकरण मांगा। स्थिति स्पष्ट है कि सत्ता पक्ष के नेताओं की हालत दयनीय नजर आयी। सत्ता की धमक सरकार की हनक बिल्कुल नजर नहीं आयी।
सनद रहे कि सांसद रहते प्रियंका रावत के जमाने में भी कई वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें कई मुद्दों पर बरगलाने का प्रयास किया था। जिसके विरूद्ध प्रियंका रावत ने ईट का जवाब पत्थर से दिया था। तत्कालीन जिलाधिकारी रहे हों या फिर उपजिलाधिकारी अथवा अपर पुलिस अधीक्षक या फिर कोई अन्य नौकरशाह। उनकी लाल फीताशाही पर प्रियंका रावत ने अपनी तेज तर्रार कार्यशैली से ऐसे कोड़े बरसाये थे कि पूरे जनपद में यह सब चर्चा का विषय बन गया था। प्रियंका का एक अधिकारी की खाल खींचवा लेने का डायलॉग आज भी लोगों को याद आ ही जाता है?
कोठी थाना क्षेत्र का नीतू द्विवेदी कांड और उसमें प्रियंका रावत का स्थानीय अधिकारियों एवं कई नेताओं की खबर लेना भी आज आवाम याद कर रहा है। भाजपाई अपना नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि आज जनपद का ऐसा शायद ही कोई विभाग हो जहां भगवा गमछा डाले हुए किसी की व्यक्ति की इज्जत से सुनवाई हो रही हो? एक भाजपाई ने कहा भाजपा के जिले में पदाधिकारी भी हैं। लेकिन वे वरिष्ठ नौकरशाहों के साथ गलबहिया डालने में गौरव महसूस करते हैं।
थानों में भले ही विधायक अथवा उनके खास लोगों की सीधे बात सुनी जाती हो लेकिन अन्य कार्यकर्ताओं का बुरा हाल है। भाजपाइयों की जुबाने सिली हुई हैं! बेअंकुश नौकरशाहों की जुबाने खुली हुई हैं? जनता एवं भाजपाई खुलकर कहते हैं कि आज शायद सत्ता पक्ष का कोई ऐसा लीडर नहीं है जो 24 घंटे के अंदर किसी बेअंकुश नौकरशाह को सबक सिखा सके?
वरिष्ठ नेता सुन्दरलाल दीक्षित सबसे पहले तासीपुर पहुंचे थे। बाद में उसी समय स्थानीय विधायक जी वहां गये। लेकिन आज हालात सामने हैं। एक जनप्रतिनिधि तो तीसरे चौथे दिन वहां पहुंचे। कुल मिलाकर देश-प्रदेश में भाजपा की सरकार है। जनपद में चार विधायक हैं। एक सांसद है। लेकिन कड़वा सत्य है कि किसी की हनक सत्ता की धमक में कड़कड़ाती नजर नहीं आती? कोविड के समय अव्यवस्थित इलाज, आक्सीजन की कमी ऐसे कई मुद्दे थे जहां जिला स्तरीय सत्ता नौकरशाही के पीछे चलकर अपना चेहरा दिखाती नजर आयी?
इन हालातों को देख भाजपाई चकित है तो जनता भी हतप्रभ है! चर्चाओं का दौर चलता है तो लोग बेबाक बोलते हैं जिले की भाजपा को पूर्व सांसद प्रियंका रावत जैसा तेज तर्रार नेता चाहिए। क्योंकि प्रियंका ने सपा शासन में भी भ्रष्ट नौकरशाहों की रूह कपा दी थी। आज जिले की कमान उनके हाथों में होती तो जिला व प्रदेश देखता! क्योंकि तब तानाशाह नौकरशाही पर जलवे से बजता प्रियंका का डंका।जी हाँ प्रियंका रावत का डंका? बिना लाग लपेट की बात है! आज भाजपा की सत्ता में जिले की भाजपा में जनप्रतिनिधि नजर आते हैं। पदाधिकारी दिखाई देते हैं। लेकिन कार्यकर्ताओं, समर्थकों, शुभचिंतकों के सम्मान के लिए खाल खिंचवा लेने का चाबुक चलाने वाला नेता नजर नहीं आता है?????
कृष्ण कुमार द्विवेदी (राजू भैया)

