लोहिया गांधी के सत्याग्रह और अहिंसा के समर्थक थे : राजनाथ षर्मा समाजवादी पुरोधा की पुण्यतिथि पर बोले समाजवादी चिंतक

अब्दुल मुईद सिटी-अपराध ब्यूरो। (एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स) 9936900677

बाराबंकी। डॉ. लोहिया राजनीतिक विचारक, चिंतक और स्वप्नद्रष्टा थे, लेकिन उनका चिन्तन राजनीति तक ही कभी सीमित नहीं रहा। मुद्वो पर व्यापक दृष्टिकोण, दूरदर्शिता उनकी चिन्तन-धारा की विशेषता थी। राजनीति के साथ-साथ संस्कृति, दर्शन साहित्य, इतिहास, भाषा आदि के बारे में भी उनके मौलिक विचार थे। लोहिया की चिन्तन-धारा कभी देश-काल की सीमा की बन्दी नहीं रही। लोहिया एक नयी सभ्यता और संस्कृति के द्रष्टा और निर्माता थे। यह बात गांधी भवन में समाजवादी पुरोधा डॉ. राममनोहर लोहिया की पुण्यतिथि पर आयोजित स्मृति सभा की अध्यक्षता कर रहे समाजवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने कही। मंगलवार को गांधी भवन में डॉ. राममनोहर लोहिया के चित्र पर मार्ल्यापण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान राजकीय सेवा में रहते हुए ईमानदारी और कर्तव्य निष्ठा की मिसाल पेश करने वाले बाबू जमील उर रहमान को सामाजिक सहभागिता सम्मान से सम्मानित कया गया। आप नेता भागीरथ गौतम ने कहा लोहिया गांधी के सत्याग्रह और अहिंसा के समर्थक थे, लेकिन गाँधीवाद को वे अधूरा दर्शन मानते थे। वे समाजवादी थे, लेकिन मार्क्स को एकांगी मानते थे। वे राष्ट्रवादी थे, लेकिन विश्व सरकार का सपना देखते थे। वे आधुनिकतम विद्रोही तथा क्रान्तिकारी थे, लेकिन शांति व अहिंसा के अनूठे उपासक थे। डॉ. लोहिया विलक्षण ऊर्जा और ताकत के साथ, लोकसभा के अंदर और बाहर, आम आदमी के लिए लड़े। डॉ. लोहिया के साथ देश ने न्याय नहीं किया। शायद ऐसा लोहिया के शिष्यों के कारण हुआ। प्रसपा नेता धनंजय शर्मा ने कहा कि सत्याग्रह, सिविल नाफरमानी, घेरा डालो, दाम बांधो, सप्तक्रांति, नर-नारी समता जैसे असंख्य सवाल व मुद्दे कार्यक्रम डॉ. लोहिया ने उठाये और लड़े। इस मौके पर पाटेश्वरी प्रसाद, हुमायूं नईम खान, मृत्युंजय शर्मा, विनय कुमार सिंह, साकेत मौर्या, सत्यवान वर्मा, मनीष सिंह, पी.के सिंह, नीरज दूबे, मनोज पाठक, रंजय शर्मा, अनिल यादव सहित कई लोग मौजूद रहे।

अब्दुल मुईद सिटी-अपराध ब्यूरो। (एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स) 9936900677

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