संघर्ष और पराक्रम के पर्याय थे नेताजी सुभाषचन्द्र बोस: राजनाथ
मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)9044641489
बाराबंकी। नेताजी सुभाषचन्द्र बोस संघर्ष और पराक्रम के पर्याय थे। वह हिन्दुस्तान के एक क्रान्तिकारी कर्मयोगी व्यक्ति थे। उनका मकसद देशवासियो में त्याग, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की भावना को पैदा करना था। इसी विचारधारा पर उन्होनें आजाद हिन्द फौज का गठन किया। जिसने ब्रिटिश साम्राज्य को उखाड़ फेंकने में अहम भूमिका निभाई। उक्त विचार गांधी भवन में स्वतंत्रता सेनानी एवं आजाद हिन्द फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 125वीं जयन्ती पर गांधी जयन्ती समारोह ट्रस्ट द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा में समाजवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने व्यक्त किए। श्री शर्मा ने कहा कि सुभाष बाबू महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धान्त को नहीं मानते थे लेकिन यह बड़ी बात थी कि उन्होनें आईएनए की तीनों ब्रिगेड का नाम गांधी, नेहरू और मौलाना आजाद रखा। सुभाष बाबू के न रहने के बाद इसी ब्रिगेड ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में नोआखाली दंगों के दौरान स्वयंसेवी की भूमिका निभाई। आज देश को ‘नेताजी’ कहे जाने वाले कर्मयोगी, देशभक्त और क्रान्तिकारी सुभाष की जरूरत है। सभा में मौजूद बाबू जमील उर रहमान ने कहा कि अपनी नेतृत्व क्षमता से नेताजी ने परतंत्र भारत में क्रान्तिकारी आन्दोलन नया मोड दिया। उन्होने देश वासियों को संगठित कर भारत को अंग्रेजों से आजाद कराया। उनका राष्ट्रीय आन्दोलन में योगदान और उनकी भूमिका आज भी हम सभी के लिए प्रेरणस्रोत है। इस मौके पर प्रमुख रूप से कांग्रेस नेत्री शिवानी सिंह, विनय कुमार सिंह, मृत्युंजय शर्मा, समाजसेवी अशोक शुक्ल, अशोक जायसवाल, सत्यवान वर्मा, पी.के सिंह, नीरज दूबे, एम.बी सिंह, बाराती लाल वर्मा, विजय कुमार सिंह, मनीष खेतान, पाटेश्वरी प्रसाद, विजय कनौजिया सहित कई लोग मौजूद रहे।
मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)9044641489

