कृमि नियंत्रण की दवाई खाने से बच्चों के सम्पूर्ण शारिरिक औऱ मानसिक विकास का संचार होता है।

शान्ती देवी अवधेश वर्मा विशेष संवाददाता मसौली जनपद बाराबंकी एसएम न्यूज़ 24 टाइम्स 8707331705

मसौली बाराबंकी। पेट मे कीड़े होना एक जन स्वास्थ्य समस्या है, कृमि नियंत्रण की दवाई खाने से बच्चों के सम्पूर्ण शारिरिक औऱ मानसिक विकास का संचार होता है। उक्त बातें मंगलवार को ब्लाक संसाधन केन्द्र बड़ागांव में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के शत प्रतिशत सफलता के लिए आयोजित एक दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत करते हुए खण्ड शिक्षा अधिकारी संजय कुमार शुक्ल ने कही।उन्होंने कहा कि कृमि संक्रमण के कारण बच्चों का मानसिक एव शारिरीक विकास बाधित होता है तथा कुपोषण एव होमोग्लोबिन की कमी के शिकार हो जाते है।बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में उत्साह पूर्वक सहयोग सफलता के भागीदार बने।और बच्चों के माता पिता को प्रोत्साहित करते हुए साफ सफाई एव खुले में शौच न करने के लिए प्रेरित करे।


प्रशिक्षण शिविर में उपस्थित प्रतिभागी शिक्षको को कार्यक्रम की शत प्रतिशत सफलता के लिए ट्रेनिगं देते हुए स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी आशाराम चौधरी ने बताया कि बच्चों में आमतौर पर तीन तरह के कीड़े होते है जिनके चलते बच्चों में खून की कमी (अनीमिया) कुपोषण, भूख न लगना,कमजोरी औऱ बेचैनी, पेट मे दर्द,जी मिचलाना उल्टी दस्त आना वजन में कमी आना कृमि संक्रमण के हानि कारक संकेत है जिनसे बचने के बच्चों को साल में दो बार एल्बेंडाजोल की दवा बहुत जरूरी है। प्रशिक्षक श्री चौधरी ने कृमि संक्रमण चक्र पर चर्चा करते हुए कहा कि संक्रमित बच्चे के शौच मे कृमि के अण्डे होते है खुले में शौच करने से ये अंडे मिट्टी में मिलकर विकसित होते है और अन्य बच्चों को चपेट में ले लेते है। श्री चौधरी ने शिक्षकों से अपील करते हुए सहयोग की अपील की। इस मौके पर एसआरजी अवधेश पांडेय, संजय श्रीवास्तव,सुरेश चंद्र, मोहम्मद असलम, अशोक कुमार वर्मा सहित क्षेत्र के समस्त सरकारी,प्राइवेट,एव मदरसों के शिक्षकगण मौजूद थे।

शान्ती देवी  अवधेश वर्मा विशेष संवाददाता मसौली जनपद बाराबंकी एसएम न्यूज़ 24 टाइम्स 8707331705

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