मादक तस्करों के बड़े नेटवर्क के आगे छोटे पड़ रहे पुलिस के लम्बे हाथ पुलिस नहीं तोड़ पा रही मादक तस्करों का जाल

बाराबंकी: रिपोर्ट शमीम अंसारी: एसएम न्यूज24टाइम्स 9415526500

बाराबंकी(एसएम न्युज24टाइम्स)। जिले में बढ़ती मादक पदार्थों की तस्करी का जाल पुलिस तोड़ नहीं पा रही है। आंकड़े बताते हैं कि अब तक पुलिस के हाथ छोटे-मोटे तस्करों की गर्दन तक ही पहुंचे हैं। बड़ी मछलियां अब भी पुलिस की गिरफ्त से काफी दूर हैं। जिले में छोटे-छोटे मारफीन तस्कर (100, 200 ग्राम व एक-एक किलो से लेकर पांच किलो तक) तो पकड़े जाते हैं किन्तु पुलिस तस्करों के आकाओं (बड़ी मछली) तक क्यों नहीं पहुंच पाती है, ऐसा ही सवाल आपके मस्तिष्क में भी कौंध रहा होगा, तो आइए हम आपको बताते हैं कि आखिर पुलिस बड़े आकाओं पर क्यों मेहरबान रहती है और उन तक क्यों नहीं पहुंच पाती है, इसका सीधा जवाब यह है कि पुलिस सब कुछ जानकर भी नहीं आकाओं को नहीं पकड़ती है, क्योंकि तस्करों के आकाओं के आकूत रूपया होता है जिससे वह पूरे सिस्टम को मैनेज करने की कूवत रखते हैं। पकड़ा मात्र जाता है छोटा सा प्यादा, और फिर उसके पकड़ने के बाद पुलिस गुडवर्क हासिल करके अपने उच्चाधिकारियों को खुश कर देती है और प्रमोशन भी प्राप्त कर लिया जाता है। पुलिस अपराधियों पर नकेल कसने के लिए दिन रात मशक्कत तो करती है लेकिन वह सिर्फ बली का बकरा बनाकर जांच को डण्डे बस्ते में डाल देती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार शौक पूरा करने और टशन बनाए रखने के लिए युवक गलत रास्ते में कदम रख चुके है। घर के महंगे नशे के लिए पैसा नहीं मिलने पर लूट, छिनैती, चोरी को अंजाम देकर उन पैसों से अय्याशी कर रहे है। शौकीनों की गोपनीय महफिल होती हैं। उनके जाल में फंस रहे युवा, नशे की लत के कारण जिंदगी दांव पर लगा चुके हैं। युवाओं में नशे का ट्रेंड भी बदल गया है। पहले जहां शराब, हुक्का, कफ सिरफ, टैबलेट, गांजा आदि का सेवन अधिक किया जाता था, अब इसकी जगह पर बड़े घरों के युवा कोकीन, ब्राउन शुगर आदि का डोज लेने लगे हैं। नशे की पार्टी का क्रेज एक बार फिर से युवाओं में खुमार बनकर चढ़ा है। ड्रग्स, अफीम और डोडा का कारोबार जोर-शोर से चलते जा रहे है। चोरी छिपे शराब पिलाने के साथ अफीम-डोडा और गांजा भी उपलब्ध कराया जाता है। नशे का कारोबार कब होगा बंद युवा पीढ़ी नशे के दलदल से आखिर कब बाहर निकलेगी, आज नशा पूरी शहर के लिये चुनौती बना हुआ है। काफी पाबंदी के बाद भी लोग इसकी आगोश में आते जा रहे हैं। बल्कि यहां तो नशे के व्यापार में महिलाओं का नाम भी खुलकर सामने आ रहा है। शहर में गांजा, अफीम आदि नशे का कारोबार तेजी बढ़ रहा है। जिससे युवा पीढ़ी की गिरफ्त में आती जा रही है। ढाबे में ज्यादातर ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोग या बड़ी गाडियां चलाने वाले आते हैं। घरों से बाहर रहकर पढने वाले भी कई छात्र-छात्राएं अक्सर ढाबे में नशा करने ही पहुंचते है। नशे के सौदागर भी युवतियों में नशे का ट्रेंड देखकर ही अफीम, ड्रग्स बेचने के लिए महिलाओं और युवतियों का सहारा लेते है। युवाओं का पसंदीदा नशा ड्रग्स, इसे कोक के नाम से भी जाना जाता हैं। विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि नशे के सौदागर लंबे पहुंच लगाते है और नशा पहुंच जाता है। पुलिस के बनाये अभियान को ठेंगा दिखाकर खुलेआम कारोबार चलता है। ड्रग्स में आधा टैल्कम पाउडर मिलाकर बेचा जा रहा है। जिससे नशा तो असली हो जाता है मगर नशे का सामान रहता नकली है। युवाओं में ड्रग्स का नशा ऐसे चढ़ता है कि युवा यूं ही झूमता रहता है। कोक को नाक के जरिए लेते हैं खाते भी हैं। नशे के सौदागरों द्वारा डिमांड के आधार पर इसे मंगाया जा रहा है। इस महंगे नशे के ग्राहक बड़ी-बड़ी गाडियों में घूमने वाले रईस हैं। नवयुवक नशे के इतने आदी हो गए है कि नहीं मिलने पर पागलपन सवार हो जाता है, जिसके कारण अपराध बढ़ रहे है। गली-मोहल्लों में पुड़ियाबाजों ने अड्डा बना रखा है। जहां से वह घरों में सप्लाई कर रहे है। खबरदारों का कहना है कि इसके पीछे छुटभैया नेताओं का हाथ है, जो उनसे अवैध वसूली कर उन्हें बचाने के लिए संरक्षण का वादा करके मारफीन व गांजा के काले कारोबार को बढ़ावा दे रहे है। गली-मोहल्ले में नशे का कारोबार करने वाले हर महीने एक निर्धारित राशि अपने मोहल्ले के नेताओं को नजराना पेश करते है और वहीं नेता चौकी और थाना मैनेज करते नजर आते हैं। नशा परोसने और खपाने का काम बहुत ही सक्रियता के साथ किया जा रहा है इस धंधे में कई रसूखदार शेयर होल्डर है, या जिनकी अधिकारियों तक पहुंच है, ऐसे लोगों के संरक्षण में नशे का सामान युवक-युवतियों द्वारा सप्लाई हो रहा हैं। जनपद में नशे के कारोबार की वजह से चोरी, छिनैती, बलात्कार, लूट आदि की घटनाएं लगातार बढ़ती ही जा रही है। कई चोरियों में पुलिस मुकदमा नहीं दर्ज करती है अगर मुकदमा हो भी हो जाये तो उसका खुलासा होने में सालों लग जाते हैं। अगर पुलिस सक्रिय रहे और छोटे तस्करों को पकड़ने के बाद उनके आकाओं तक पहुंचकर गिरोह का खुलासा कर दे तो जल्द ही इस समस्या से जनता को निजात मिल सकती है।

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