इस युद्ध में जनरल रैपर ईरानी कमांडर की भूमिका में थे। उन्होंने तेज़ी से ईरान की ओर बढ़ते अमरीकी युद्धपोतों और नौसेना के बेड़ों पर ईरानी स्पीड बोट्स जैसी बोट्स और नीची उड़ान भरने वाले ईरानी युद्धक विमानों की मदद से, हमला करने का आदेश दिया, मात्र दस मिनट में सब कुछ खत्म हो गया। ईरानी कमांडर का रोल अदा करने वाले जनरल वेन रेपर युद्ध जीत चुके थे।
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यह परिणाम अमरीकी सेना के लिए इतना चौंका देने वाला था कि सेना के कमांडरों ने युद्धाभ्यास में हस्तक्षेप करके ईरानी कमांडर की भूमिका निभाने वाले जनरल वेन रैपर से कहा गया कि वह अपने युद्धपोतों की संख्या कम करें और इसी प्रकार उन्हें कई निर्देश दिये गये और जब उन्होंने इसकी शिकायत अपने कमांडर से की तो उनसे कहा गया कि आप, ईरानी कमांडर की भूमिका से आगे बढ़ रहे हैं, दुश्मन का कमांडर वह सब कुछ नहीं करेगा जो आप कर रहे हैं। इस तरह से अमरीकी सेना ने ईरान के खिलाफ युद्धाभ्यास का परिणाम अपने हित में करने का प्रयास किया।
डेविड एक्स ने नेशनल इन्ट्रेस्ट में अपने लेख में लिखा था कि वास्तविक युद्ध में कोई अमरीका को जिताने के लिए, रणनीति बदलने का आदेश नहीं दे सकता। अगर वास्तव में ईरान जनरल वेन रैपर की रणनीति के अनुसार अमरीकी नौसेना पर हमला करता है तो निश्चित रूप से उसका नुक़सान, इस युद्धाभ्यास में वेन रेपर के सैनिकों द्वारा पहुंचाए गये नुक़सान से कहीं अधिक विनाशकारी होगा।

