राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई गई लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती

मुकीम अहमद अंसारी संवाददाता (एसएम न्युज24 टाइम्स) बदायूं 9719216984

जिले में जगह-जगह सरदार पटेल की 147वीं जयंती पर रन फॉर यूनिटी दौड़ का आयोजन किया गया, जहां युवाओं सहित सरकारी महकमों के अधिकारी और कर्मचारियों ने भी भाग लिया।


बदायूँ। लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती को पूरे देश में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया। जिले में भी जगह-जगह सरदार पटेल की 147वीं जयंती पर रन फॉर यूनिटी दौड़ का आयोजन किया गया, जहां युवाओं सहित सरकारी महकमों के अधिकारी और कर्मचारियों ने भी भाग लिया। दौड़ में बड़ी तादाद में युवा और अधिकारी कर्मचारी शामिल हुए। रन फॉर यूनिटी दौड़ पूरी होने पर सभी को राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलाई गई। सोमवार को कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में जिलाधिकारी प्रशासन विजय कुमार सिंह ने सिटी मजिस्ट्रेट बृजेश कुमार सिंह तथा जिला राजस्व अधिकारी महिपाल सिंह सहित अधिकारी एवं कर्मचारियों ने लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के चित्र पर पुष्प अर्पित कर सभी को राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलाई। लौह पुरुष को याद करते हुए अधिकारियों ने कहा कि सरदार पटेल आजाद भारत के पहले उप प्रधानमंत्री थे। देश की आजादी में सरदार पटेल ने अभूतपूर्व योगदान दिया, जिसके बाद अंग्रेजो की गुलामी से आजाद हुए भारत में सरदार पटेल को देश के पहले प्रधानमंत्री के तौर पर देखा जाने लगा था। सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म गुजरात के खेड़ा जिले में 31 अक्तूबर 1875 को हुआ था। वह एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे। हालांकि एक साधारण किसान परिवार का लड़का अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर भविष्य में खास बन गया। वल्लभ भाई पटेल ने शराब, छुआछूत और नारियों पर अत्याचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी। हिन्दू-मुस्लिम एकता को बनाए रखने की पुरजोर कोशिश की। आजादी की लड़ाई के दौरान वह कई बार जेल भी गए लेकिन पटेल की दृढ़ता के सामने अंग्रेजी हुकूमत को झुकना पड़ा। सबसे बड़ी चुनौती देसी रियासतों का भारत में विलय था। छोटे बड़े राजाओं, नवाबों को भारत सरकार के अधीन करते हुए रजवाड़े खत्म करना कोई आसान काम नहीं था लेकिन बिना किसी जंग के सरदार पटेल ने 562 रियासतों का भारत संघ में विलय कराया।

मुकीम अहमद अंसारी संवाददाता (एसएम न्युज24 टाइम्स) बदायूं 9719216984

 

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