आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा है कि अमरीका के भारी दबावों के मुक़ाबले में ईरानी राष्ट्र की सहन शक्ति ने विश्व के टीकाकारों को अचंभे में डाल दिया है।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने इस्लामी क्रांति की सफलता की वर्षगांठ के अवसर पर रैलियों में भारी जनता की उपस्थिति और साथ ही शहीद क़ासिम सुलैमानी तथा की शव यात्रा में उमड़े जनसैलाब की ओर संकेत करते हुए कहा कि हर प्रकरा के अमरीकी दबावों के मुक़ाबले में ईरानी राष्ट्र की सहन शक्ति ने टीकाकारों और विशलेषकों को अचंभित कर रखा है।
शनिवार को सैकड़ों नौहा और मसियाख़ानों ने तेहरान में इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता से भेंट की। वरिष्ठ नेता उनको संबोधित करते हुए कहा कि आपका मुख्य काम इस्लामी जीवनशैली का प्रचार व प्रसार करना है। उन्होंने कहा कि अगर हम शत्रुओं के सांस्कृतिक हमलों के मुक़ाबले में सही इस्लामी जीवनशैली पेश करना चाहते हैं तो फिर उसका एकमात्र रास्ता, संस्कृति तैयार करना है।
वरिष्ठ नेता ने कहा कि ईश्वर पर भरोसा और शत्रु से न डरना, इस्लामी जीवनशैली का एक हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस्लामी क्रांति के आरंभिक दिनों में यदि यह कहा जाता कि वैज्ञानिक, तकनीकी, कूटनीतिक और क्षेत्रीय प्रभाव की दृष्टि से ईरान एसा होता जैसाकि वर्तमान समय में है तो उस समय कोई भी इसे स्वीकार नहीं करता किंतु ईरानी राष्ट्र ने ईश्वर पर भरोसा करके किसी भी शक्ति से भयभीत हुए बिना आज प्रगति के क्षेत्र में यह स्थान हासिल कर लिया है।
आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने अमरीका के मुक़ाबले में ईरानी राष्ट्र को घुटने टेकने के लिए राज़ी करने के उद्देश्य से पश्चिमी थिंक टैंक की ओर से तैयार किये गए व्यापक दुष्प्रचारों की ओर संकेत करते हुए कहा कि ईश्वर की कृपा से ईरानी राष्ट्र अबतक प्रतिरोध करता आया है और आगे भी प्रतिरोध करता रहेगा। उन्होंने कहा कि इस प्रतिरोध के लिए ज़रूरी है कि मानवीय शक्ति को लगातार इंजेट किया जाता रहे। वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान में प्रतिरोध की भावना अब भी जीवित है। उनका कहना था कि जिन-जिन अवसरों पर मैदान में उपस्थित होने की ज़रूरत थी उन अवसरों पर ईरानी राष्ट्र ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है किंतु इस भावना के जारी रहने के लिए धार्मिक संस्कृति के बोध को अधिक से अधिक मज़बूत करने की ज़रूरत है।
वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस महत्वपूर्ण काम की ज़िम्मेदारी, नौहा और मसियाख़ानों पर आती है। उन्होंने कहा कि ईश्वर की कृपा से इस्लामी गणतंत्र ईरान के पास हर हिसाब से योग्यताएं पाई जाती हैं जैसे उसके पास अच्छे सैन्य कमांडर, वैज्ञानिक, मेधावी, जुझारू शोधकर्ता, हिम्मती युवा, स्वाभिमानी कलाकार और इसी प्रकार की बहुत सी क्षमताएं पाई जाती हैं। इन क्षमताओं के साथ ईश्वर की कृपा से शत्रु के मुक़ाबले में ईरानी राष्ट्र की विजय सुनिश्चित है।
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