एसडीएम की कार्यशैली से क्षुब्ध ट्रस्ट हाईकोर्ट में करेगा अपील

मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)9044641489

बाराबंकी। पूर्व चर्चित उप जिलाधिकारी सिरौलीगौसपुर अपनी ही कागजी कार्यवाही में फंसती नजर आ रही हैं। प्रकरण में बकौल शिकायतकर्ता संस्थापक अध्यक्ष ट्रस्ट जल्द ही हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की जायेगी। बताते चलें कि एसडीएम सिरौलीगौसपुर प्रिया सिंह द्वारा अपने पेशकार के माध्यम से 55 हजार रिश्वत मांगने, नियमानुसार कार्य न करने एवं मानसिक उत्पीड़न के सम्बंध में की गई शिकायत पर राजस्व परिषद के आयुक्त एवं सचिव तथा राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के कंसल्टेंट लॉ डिवीजन ने डीएम बाराबंकी को जांच व कार्यवाही के लिए पत्र भेजा था। इस सम्बंध में एसडीएम ने जिलाधिकारी को अपनी आख्या भेजी। जिसकी एक प्रति शिकायतकर्ता को भी भेजा। एसडीएम की आख्या को गलत बताते हुए शिकायतकर्ता लवकुश शरण आनंद संस्थापक अध्यक्ष आर्यावर्त नागरिक सेवा ट्रस्ट ने सम्बन्धित अधिकारियों को प्रतिपुष्टि भेजा है। ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष ने बताया कि आख्या में जिन सुनवाई की नियत तिथियों का उल्लेख है, उसकी कोई सूचना ही नहीं दी गई। एसडीएम के द्वारा बैकडेट में भेजी गई नोटिस की रिसीविंग उसके पास हैं। एसडीएम सिरौलीगौसपुर के विरूद्ध कागजी अनियमितताओं के पर्याप्त साक्ष्य एकत्रित हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय से जवाब मांगा गया है। अन्य जांच अधिकारियों से भी उनकी जांच आख्या प्राप्त करने हेतु पत्राचार किया गया है। शीघ्र ही संगठन के लोगों से विचार विमर्श कर माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जायेगी।

तीन माह बाद भी नहीं दर्ज हुआ आदेश

बकौल संस्थापक अध्यक्ष ट्रस्ट, उप जिलाधिकारी सिरौलीगौसपुर प्रिया सिंह ने आख्या में बताया है कि आठ अगस्त 2022 को आदेश पारित कर दिया गया है। जिसकी छायाप्रति आख्या में संलग्न बताया है। परन्तु, उसे अब तक कोई भी आदेश की प्रति नहीं उपलब्ध करायी गयी है। राजस्व संहिता 2006 की धारा 80 के अन्तर्गत नियम यह है कि उप जिलाधिकारी द्वारा आदेश किये जाने की तिथि से तीन दिन के अन्दर वह आदेश खतौनी पर दर्ज हो जाना चाहिए। अपितु, तीन माह के बाद भी खतौनी पर कोई आदेश नहीं दर्ज किया गया है।

आरटीआई से अनावरण, सवालों में तहसील प्रशासन

आर्यावर्त नागरिक सेवा ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष ने बताया कि तहसील सिरौलीगौसपुर प्रशासन का भ्रष्टाचार में संलिप्त होना तो आरटीआई के भ्रामक जवाब से ही सिद्ध हो गया है। देरी बस शीर्ष अधिकारियों द्वारा गहनता से जांच की है। एक अन्य आरटीआई के दो अलग अलग जवाब दिये गये हैं। जिससे यह लोग स्वयं की ही कागजी कार्रवाई में फंसते जा रहे हैं। जन सूचना अधिकार के तहत अपील के बाद आवेदन का भ्रामक जवाब भेजना, अपील सुनवाई तिथि की सुनियोजित प्लानिंग कर एक दिन पूर्व ही सूचना देना, उसके बाद उसे निस्तारित कर देना आदि नियम विरूद्ध कार्यशैली से तहसील प्रशासन सवालों मे है। सनद रहे कि भ्रष्टाचार में डूबे नौकरशाह अक्सर आरटीआई का स्पष्ट जवाब महज आवेदन व प्रथम अपील में नहीं देते हैं। सूचना आयोग के हस्तक्षेप के बाद यह लोग हरकत में आते हैं। यहाँ भी यही होगा। अग्रिम प्रक्रिया मुसलसल बदस्तूर जारी है। मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)9044641489

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