अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन पर तालेबान की ताक़त के सामने घुटने टेके हैं

समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ

ग़नी बरादर और अमरीका की ओर से ज़लमै ख़लीलज़ाद ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
10 मार्च तक अफ़ग़ान सरकार तालेबान के 5 हज़ार सदस्यों को जेलों से रिहा करेगी। अमरीका 14 महीने के भघीतर अपने सैनिकों को और गैर डिप्लोमेटिक कर्मचारियों को अफ़ग़ानिस्तान से निकाल लेगा। तालेबान अफ़ग़ानिस्तान में अलक़ायदा और अन्य आतंकी संगठनों से कोई सहयोग नहीं करेंगे।
समझौता तो हो गया है लेकिन दोनों की पक्ष समझौते को शक की नज़र से देखते हैं। अभी अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य के प्रशासन के बारे में कोई स्पष्ट रोडमैप तय नहीं किया गया है तो सवाल यह है कि इतनी जल्दबाज़ी में समझौते पर हस्ताक्षर क्यों किए गए। इसका एक कारण तो यह है कि ट्रम्प को एक चुनावी मुद्दा मिल गया है और इसे वह अपनी एक सफलता के रूप में पेश कर सकेंगे।
तालेबान के पांच हज़ार लड़ाके आज़ाद हो रहे हैं और उन्हें यह भी पता है कि अगर विदेशी सेनाएं निकल गईं तो वह बहुत आसानी से काबुल की सत्ता अपने हाथ में ले लेंगे और अपनी इच्छा के अनुसार शासन करेंगे।
मगर यह भी तय माना जा रहा है कि अमरीका आसानी से अफ़ग़ानिस्तान को छोड़ने पर तैयार नहीं होगा।  तालेबान ने एक चालाकी यह भी की है कि हथियार छोड़ने की उन्होंने कोई शर्त नहीं मानी है इसका मतलब यह है कि वह किसी भी समय अपने हमले दोबारा शुरू कर सकते हैं।
अमरीका और तालेबान के शांति समझौते के बारे में यही कहा जा सकता है कि अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन पर तालेबान की ताक़त के सामने घुटने टेके हैं।

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