पुतीन और अर्दोग़ान की शिखर वार्ता में तुर्की की इज़्ज़त बच गई और सैनिक टकराव रुका, सीरियाई सेना ने जो इलाक़े हासिल किए उसके पास रहेंगे, अंकारा वापस आकर अर्दोग़ान के सामने होंगे तीन बड़े संकट!

समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ

तुर्क राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान अपने रूसी समकक्ष पुतीन से लंबी वार्ता के बाद सीरिया के इलाक़े इदलिब में संघर्ष विराम की घोषणा करते हैं तो इसका साफ़ मतलब यह है कि इस इलाक़े में यथास्थिति बनी रहेगी यानी सीरियाई सेना उन इलाक़ों में मौजूद रहेगी जिन्हें उसने हालिया दिनों के भीतर आज़ाद कराया है और जिनका क्षेत्रफल लगभग 600 वर्ग किलोमीटर है।
यह समझौता अर्दोग़ान की इज़्ज़त बचाने वाला समझौता था क्योंकि उन्होंने बसंत ढाल के नाम से जिस सैनिक आप्रेशन का एलान कर दिया था उसमें वह अपने साथ तुर्की को भी डुबो सकते थे।
सीरिया के मामले में पुतीन की रणनीति के कई महत्वपूर्ण पहलू हैं। एक तो चरमपंथियों के क़ब्ज़े वाले इलाक़ों को आज़ाद कराना और दूसरे इस स्थिति को तुर्की से भी स्वीकार करवा लेना है। रूस और तुर्की के सैनिकों की संयुक्त गश्त का यही मतलब है।
दोनों राष्ट्रपतियों के बीच लंबी वार्ता से साफ़ ज़ाहिर है कि मतभेद काफ़ी गहरे हैं। रूस का स्टैंड बिल्कुल स्पष्ट था कि सीरियाई सेना ने सूची समझौते के तहत उन इलाक़ों पर हमला किया जिन पर चरमपंथियों का नियंत्रण था जबकि तुर्की ने इस समझौते पर अमल करने में आनाकानी की। रूस अपने स्टैंड से तनिक भी पीछे नहीं हटा है।
यह बात भी महत्वपूर्ण है कि समझौते में एम-4 राजमार्ग पर रूसी और तुर्क सैनिकों की संयुक्त गश्त की तो बात कही गई है जो हलब को लाज़ेक़िया से जोड़ता है लेकिन हलब को दमिश्क़ से जोड़ने वाले एम-5 राजमार्ग का कोई उल्लेख नहीं है यानी एम-5 राजमार्ग सीरियाई सेना के नियंत्रण में ही रहेगा इसमें तुर्की या उसके द्वारा समर्थित चरमपंथी संगठनों की कोई भूमिका नहीं रहेगी। यह सीरिया की अर्थ व्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण कामयाबी है।
समझौते में इदलिब के इलाक़े में आम नागरिकों के लिए सुरक्षित कारीडोर बनाने की बात कही गई है जिससे गुज़रकर वह उन इलाक़ों में जा सकते हैं जिन पर सीरियाई सेना का नियंत्रण है। यही पूर्वी हलब, ग़ूता और अन्य कुछ इलाक़ों में भी हुआ था। इसका नतीजा यह होगा कि चरमपंथी संगठन आम नागरिकों को मानव ढाल नहीं बना पाएंगे।
राष्ट्रपति पुतीन ने एक दस्तावेज़ की बात कही जिसमें कई बिंदुओं पर सहमति हुई है तो इसका मतलब यह है कि सूची समझौते में कुछ बदलाव किया गया है और वह इसलिए कि तुर्की ज़मीनी सच्चाई को स्वीकार करते हुए अपनी ज़िद छोड़े।
राष्ट्रपति पुतीन ने कहा कि इदलिब में चरमपंथी संगठनों की गतिविधियों के कारण लड़ाई हुई और इसमें तुर्क सैनिक मारे गए। इसका मतलब यह है कि पुतीन ने अर्दोग़ान के उस बयान को पूरी तरह ख़ारिज कर दिया जिसमें उन्होंने लड़ाई और तनाव के लिए सीरियाई सेना को ज़िम्मेदार ठहराया था।
समझौते की बातों पर ध्यान देने से यह बात समझ में आती है कि राष्ट्रपति अर्दोग़ान अपनी धमकियों और उत्तेजित बयानों से बहुत बुरी स्थिति में पहुंच गए थे और इस स्थिति से बाहर निकलने का उन्हें एक रास्ता दिया गया है।
आम नागरिकों के लिए सुरक्षित कारीडोर पर सहमति से अर्दोग़ान की यह चिंता दूर हो गई कि आम नागरिक तुर्की की सीमा की ओर जा सकते थे जो पहले ही शरणार्थियों के संकट से जूझ रहा है।
इदलिब में अर्दोग़ान का संकट अस्थायी रूप से थम गया है लेकिन अब उनके सामने तीन बड़े संकट हैं। एक संकट यूरोप के साथ है क्येंकि अर्दोग़ान ने सीरियाई शरणार्थियों को यूरोपीय देशों की सीमा की ओर रवाना कर दिया है ताकि यूरोप पर दबाव डालें और इसका उलटा नतीजा निकला है। दूसरा संकट घरेलू है जिसकी झलक तुर्की की संसद में होने वाली मारपीट में दिखाई दी। तीसरा संकट चरमपंथी संगठनों के साथ है जो मास्को में होने वाले समझौते से नाराज़ हैं और यह मानते हैं कि अर्दोग़ान पूरी तरह पीछे हट गए। इन संगठनों ने बड़ी उम्मीद लगा रखी थी कि तुर्की रूस की सेना का मुक़ाबला करेगा।
अब्दुल बारी अतवान
अरब जगत के जाने माने टीकाकार

Don`t copy text!