बाल विवाह के खिलाफ मशाल कैंडल लेकर अलख जगाने उतरीं इससे पीड़ित महिलाएं, स्कूली बच्चे, धार्मिक नेता एवं ग्रामीणों ने ली शपथ, किया जागरूक
बदायूं। दिनांक 16 अक्टूबर की शाम बाल विवाह मुक्त भारत दिवस पर निकाला गया कैंडल मार्च।
बाल विवाह के खिलाफ मशाल, केंडिल लेकर अलख जगाने उतरीं इससे पीड़ित महिलाएं, स्कूली बच्चे,धार्मिक नेता एवं ग्रामीणों ने ली शपथ, किया जागरूक।
पूरे देश में चल रहे “बाल विवाह मुक्त भारत”अभियान के तहत 16 अक्टूबर को मनाए गए बाल विवाह मुक्त भारत दिवस के मौके पर गैर सरकारी संगठन काशी समाज शिक्षा विकास संस्थान बदायूं (उत्तर प्रदेश) के जिला बदायूं में (पांच ब्लाकों में) सलारपुर, कादर चौक,म्याऊं, जगत,उझानी के गांवो के साथ साथ पूरे जनपद एवं जिला शाहजहांपुर के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय कलान शाहजहांपुर में भी मशाल कैंडिल मार्च जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया। इन कार्यक्रमों में 77 गांव एवं 93 स्कूलो के बच्चों, धार्मिक नेता, ग्रामीण संख्या 42061 लोगों, पीड़ित 16 तारीख महिलाओं, बच्चों और आम लोगों ने शपथ ली कि वे न तो बाल विवाह का समर्थन करेंगे और न इसे बर्दाश्त करेंगे। बड़े पैमाने पर हुए इन कार्यक्रमों में ग्राम पंचायत मुखिया पंचायत सहायक,आदि सहित आशा, आंगनबाड़ी, सखी लोगों ने हिस्सा लेंगे और इसे सफल बनाने में योगदान देंगे।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- 5 (एनएचएफएस-2019-21 ) के आंकड़ों के अनुसार पूरे देश में 20 से 24 आयुवर्ग के बीच की 23.3 प्रतिशत युवतियों का विवाह 18 वर्ष की होने से पहले ही हो गया था जबकि जिला बदायूं (उ. प्र.) में अधिकतर लड़कियों का विवाह 18 वर्ष की होने से पहले हो गया था।
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान देश के 300 से भी ज्यादा जिलों में चलाया जा रहा है। भारत से 2030 तक बाल विवाह के समग्र खात्मे के लक्ष्य के साथ पूरी तरह से महिलाओं के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान से देश के 160 गैर सरकारी संगठन जुड़े हुए हैं। सोलह अक्टूबर को इस अभियान के एक साल पूरे हुए। इस अर्से में पूरे देश में हजारों बाल विवाह रुकवाए गए और लाखों लोगों ने अपने गांवों और बस्तियों में बाल विवाह का चलन खत्म करने की शपथ ली।
सभी स्कूलों में पूरे दिन गांवों में रात्रि मशाल,कैंडल मार्च के माध्यम से इस अभियान के समर्थन में उतरे लोगों की चहल पहल रही और इस दौरान. जनपद बदायूं (उ.प्र.) के पांच ब्लाकों के साथ पूरे जनपद में जैसे तमाम कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
सूरज ढलने के बाद हजारों लोगों ने हाथों में मशाल,केंडिल लेकर मार्च भी किया और लोगों को जागरूक करते हुए संदेश दिया कि नए भारत में बाल विवाह की कोई जगह नहीं है। इस मार्च में स्कूली बच्चों, ग्रामीणों, धार्मिक नेताओं सहित समाज के सभी वर्गों और समुदायों के लोगों ने हिस्सा लिया। इस मार्च का मकसद गांवों और कस्बों में लोगों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूक करना है। इस दौरान विवाह समारोहों में अपनी सेवाएं देने वालों जैसे कि शादियों में खाना बनाने वाले हलवाइयों, टेंट-कुर्सी लगाने वालों,फूल माला बेचने व सजावट करने वालों, पंडित और मौलवी जैसे पुरोहित वर्ग को जागरूक करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
बाल विवाह की पीड़ा से गुजरने के बाद अब इसके खात्मे के लिए अलख जगा रहीं जिला बदायूं (उ. प्र.) की ग्राम पंचायत की महिला मुखियाओं, आंगनबाड़ी धार्मिक नेता, समूह सखी ने कहा,कि काशी समाज शिक्षा विकास संस्थान बदायूं के सचिव श्रीमती मीना सिंह ने कहा,“बाल विवाह वो अपराध है जिसने सदियों से हमारे समाज को जकड़ रखा है। लेकिन नागरिक समाज और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य को बाल विवाह मुक्त बनाने के प्रति दिखाई गई प्रतिबद्धता और प्रयास जल्द ही एक ऐसे माहौल और तंत्र का मार्ग प्रशस्त करेंगे जहां बच्चों के लिए ज्यादा सुरक्षित और निरापद वातावरण होगा। इन दोनों द्वारा साथ मिल कर उठाए गए कदमों और लागू किए गए कानूनों के साथ समाज व समुदाय की भागीदारी 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत सुनिश्चित करेंगी।”
काशी समाज शिक्षा विकास संस्थान बदायूं कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन फाउंडेशन दिल्ली के साथ कार्य कर रहा है संस्था विगत 30 वर्षों से बच्चों बच्चों की शिक्षा,महिलाओं के अधिकार व स्वास्थ्य शिक्षा एवं विकास पर कार्य कर रही है।
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. श्रीमती मीना सिंह
9412427381,9719561288,
*मुकीम अहमद अंसारी संवाददाता (एसएम न्युज 24 टाइम्स) बदायूं 9719216984*

