हमें औलिया-अल्लाह और बुजुर्गों के नक़्शे-क़दम पर चलना चाहिए: सज्जादानशीन काशिफ़ ज़िया हज़रत मखदूम शेख़ हिसामुद्दीन रह0 का उर्स-क़ुल क़दीम रस्मो-रिवायत के साथ सम्पन्न

मामून अंसारी जिला ब्यूरो चीफ़ बाराबंकी

फतेहपुर- बाराबंकी। इन्सानियत एवं मोहब्बत का पैग़ाम देने वाले मशहूर सूफ़ी बुज़ुर्ग हज़रत मखदूम शेख़ हिसामुद्दीन रह0 ने बगैर किसी भेदभाव के हर इन्सान को गले लगाया और अपनी सारी जिंदगी इन्सानियत की ख़िदमत करते हुए सभी को अम्न और भाई-चारे का पैग़ाम दिया। उक्त विचार दरगाह हज़रत मखदूम हिसामुद्दीन रह0 के उर्से-मुबारक के अवसर पर सज्जादा नशीन काशिफ ज़िया ने रखे। उन्होंने आगे कहा कि हम सभी को अपने औलिया-अल्लाह और बुजुर्गों के नक़्शे-क़दम पर चलना चाहिए। आज भी इनके मानने और चाहने वाले लोग बड़े ही अदब, एहतिराम के साथ उर्से-मुबारक में शिरकत करके अपना नज़राना-ए-अक़ीदत पेश करते हैं।

मालूम हो कि दरगाह हज़रत शेख़ मखदूम हिसामुद्दीन रह0 फतेहपुर की निसबत से लगने वाला पन्द्रह दिवासीय मेले में कल बाद  नमाज़ इशा दरगाह परिसर में हज़रत मखदूम शेख़ हिसामुद्दीन रह0 और हकीम अब्दुल गनी उर्फ बन्ने मियाँ मरहूम सज्जादह नशीन, के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। कुल शरीफ का आगाज़ हाफिज कारी मोहम्मद शक़ील के ज़रीए तिलावते-क़ुरआन से हुआ। बाद कुल शरीफ के दरगाह के सज्जादा नशीन ने शेख़ काशिफ़ ज़िया ने दुआ कराई और सलाम पेश किया। दुआ व सलाम के बाद शीरीनी व तबर्रुक तक़सीम किया गया। उर्स क़ुल के मौके पर दरगाह पर जायरीन व अक़ीदतमंदों ने आकर मज़ार पर चादर चढ़ाई और उर्स व कुल में शिरकत कर दुआएँ माँगी।

इस मौके पर शेख़ तालिब ज़िया, पत्रकार सय्यद खालिद महमूद, मोहम्मद फ़ारूक़, हाफिज मो0 लातीफ़, हाफिज मो0 रहमान, हाफिज मो0 जुनैद, मोहम्मद इब्राहीम, माहेनूर, मास्टर मोहम्मद जावेद, मोहम्मद अकरम अंसारी, मोहम्मद सलीम, मो0 अहमद, मेराज अहमद, कज्जन भाई, सहित काफ़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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