कथा व्यास कुलदीप मृदुलांश ने श्री राम जी के राजतिलक की कथा का बखान किया।

अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी

मसौली बाराबंकी ।विकास खंड मसौली की ग्राम पंचायत ज्योरी स्थित दुर्गा मंदिर पर चल रही साप्ताहिक श्रीराम कथा में सोमवार को कथा व्यास कुलदीप मृदुलांश ने श्री राम जी के राजतिलक की कथा का बखान किया।


जब श्रीराम जी अवध वापस लौटे तब अवधपुरी बहुत ही सुंदर सजाई गई। देवताओं ने पुष्पों की वर्षा की झड़ी लगा दी। प्रभु को देखकर मुनि वशिष्ठजी के मन में प्रेम भर आया। उन्होंने तुरंत ही दिव्य सिंहासन मँगवाया, जिसका तेज सूर्य के समान था। उसका सौंदर्य वर्णन नहीं किया जा सकता। ब्राह्मणों को सिर नवाकर श्री रामचंद्रजी उस पर विराज गए।
श्री जानकीजी के सहित रघुनाथजी को देखकर मुनियों का समुदाय अत्यंत ही हर्षित हुआ। तब ब्राह्मणों ने वेदमंत्रों का उच्चारण किया। आकाश में देवता और मुनि ‘जय, हो, जय हो’ ऐसी पुकार करने लगे
*प्रथम तिलक बसिष्ट मुनि कीन्हा। पुनि सब बिप्रन्ह आयसु दीन्हा॥सुत बिलोकि हरषीं महतारी। बार बार आरती उतारी।।*
भावार्थ:-सबसे पहले मुनि वशिष्ठजी ने तिलक किया। फिर उन्होंने सब ब्राह्मणों को तिलक करने की आज्ञा दी। पुत्र को राजसिंहासन पर देखकर माताएँ हर्षित हुईं और उन्होंने बार-बार आरती उतारी।
इस प्रकार श्री राम के राजतिलक के साथ संपन्न हुई कथा के अंतिम दिन हवन,पूजन वैदिक मंत्रोच्चारण से आहुति डालकर कथा का समापन किया गया।

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