रामजन्मभूमि मंदिर में पधारेंगे चारों ओर हर्ष उल्लास भक्तिमय वातावरण

अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी

मसौली बाराबंकी । 22जनवरी की वह घड़ी आ गयी जिसकी प्रतीक्षा भारत ही नहीं विश्व के करोड़ों सनातनी राम भक्त अपने प्रभू भगवान श्रीराम को पांच सौ वर्षों बाद नवीन रामजन्मभूमि मंदिर में पधारेंगे चारों ओर हर्ष उल्लास भक्तिमय वातावरण व्याप्त है

परन्तु यह हर्षोल्लास राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े नीव का पत्थर बने उन कारसेवकों के बिना अधूरा है जिन्होंने राम काज के लिए अपने को शहीद कर दिया या घायल हुए और जेल भरो आंदोलन में लाठियां खाते हुए तत्कालीन सरकार ने कययों बार अपराधियों की तरह जेल में ठूंसा वह हंसते अपने नेतृत्व विश्व हिंदू परिषद परिषद के अध्यक्ष स्व अशोक सिंहल स्व राम चन्द्र परमहंस जी दीदी मां ऋतम्भरा जी नृत्य गोपाल जी ब्रम्हलीन महंत अवैध नाथ जी बजरंग दल के नेता विनय कटियार जैसे तमाम अपने नेताओं के एक हुंकार पर राम लला हम आयेंगे मंदिर यहीं बनायेंगे के नारे के साथ मर मिटने को तैयार थेऐसे ही तमाम गुमनाम कारसेवक हमारे सफदरगंज क्षेत्र के प्रमुख रूप से स्व 0पी सिंह श्रीवास्तव स्व0रमेश चन्द गुप्ता डा यमुना शरण वर्मा अमित गुप्ता अभय सिंह प्रमोद मोदी सन्त प्रसाद यादव स्व0 बब्बू कश्यप दया शंकर हलवाई श्रीकान्त वर्मा उर्फ पप्पू आदि ने आन्दोलन में बढ़चढ़कर राम काज में हिस्सा लिया पर जब अयोध्या में राम लला विराजमान होने जा रहे तो लगता है इनकी उपस्थिति अवश्य होनी चाहिये थीयहा पर जानकारी से यह पता चला कि डॉ यमुना शरण वर्मा राम मंदिर आंदोलन में चोटिल भी हुए थे. जब हमारे संवाददाता ने उनसे बात की तो उन्होंने बताया कि अब राम जी टेंट से उठ कर इतने भव्य मंदिर में आ गए है इसकी बहुत खुशी है मुझे न विधान सभा का टिकट चाहिए न विधान परिषद का परंतु सरकार अगर आंदोलन के सिपाहियों को भी वहाँ बुलाती तो और अच्छा होता.

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