क्षेत्र में चिकित्सा कार्य करने वाले डॉक्टरों को एकदिवसीय प्रशिक्षण देकर प्रभावित मरीजों की जान बचाने के गुर सिखाए

अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी

मसौली बाराबंकी। आकस्मिक दशाओं को लेकर शनिवार को हिंद मेडिकल कॉलेज में वृहद कार्यशाला हुई। इसमें ग्रामीण व सुदूर क्षेत्र में चिकित्सा कार्य करने वाले डॉक्टरों को एकदिवसीय प्रशिक्षण देकर प्रभावित मरीजों की जान बचाने के गुर सिखाए गए।

इस मौके पर संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ के डॉ.ओम प्रकाश संजीव ने कहा कि सांप काटने की दशा में जल्दी अस्पताल पहुंचाना महत्वपूर्ण है।विष ग्रसित मरीज के अंग पर कभी भी पट्टा ना बांधें। चूसकर विष न निकालें। मरीज के साथ ही सांप को अस्पताल ले जाने वाली भ्रांतियों से बचें। सबसे पहले निकटवर्ती अस्पतालों को पहुंचने पर जोर दें, जहां पर सर्पदंश ग्रसित का उपचार उपलब्ध हो। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉ.मनोज त्रिपाठी ने आकस्मिक प्राथमिक चिकित्सा प्रबन्धन पर व्याख्यान देते हुए कहा कि हार्ट अटैक प्रभावित मरीज की पहचान कैसे होगी, उपचार क्या तय होंगे। सीने में दर्द,अचानक लकवा ग्रस्त होने पर मरीज का क्या उपचार अपनाना चाहिए। इसे विस्तार पूर्वक समझाया। वरिष्ठ मधुमेह विशेषज्ञ डॉक्टर अनुज माहेश्वरी ने मधुमेह बीमारी में शुरुआती जांचों पर जोर दिया। कहा कि ऐसी दवाइयों को बिल्कुल न अपनाएं, जिनसे शरीर का मधुमेह स्तर बहुत जल्दी गिर जाता हो। 20 से 25 वर्ष की आयु में यदि मधुमेह के लक्षण दिखें तो उसे भी नजरअंदाज ना करके उपचार करना चाहिए। ताकि मरीज की बीमारी को खतरनाक बनने से रोका जा सके। निश्चेतन विभाग के प्रोफेसर सोमनाथ लोंगानी ने अचानक बेहोशी की दशा वाले मरीज,मुर्छित,रुकी दिल की धड़कन को वापस लाने के लिए कहा कि छाती में कम्पन देकर यानी सीपीआर तरीका काफी कारगर है। ऐसी दशा में समय बहुत कम होता है,जिसके असर से दिमाग नष्ट होने में केवल चार मिनट बाकी रहते हैं। इसलिए चार मिनटों में ही कोई कारगर उपचार हो जाना चाहिए।इसमें बिजली के झटके(इलेक्ट्रिक शॉक) अच्छा काम करते हैं। इसलिए अस्पतालों में ऐसी सारी सुविधाएं मुहैया होनी चाहिएं।अस्थि विभागाध्यक्ष प्रो दीपक श्रीवास्तव ने ट्रामा प्रबन्धन पर जानकारी दी। कहा कि मार्ग दुर्घटनाओं की दशा में मरीज को हमेशा इमरजेंसी सुविधा युक्त अस्पताल पहुंचाना चाहिए।इसमें पहला एक घण्टा बहुत महत्वपूर्ण होता है। पूर्व संयुक्त चिकित्सा निदेशक डॉ शशि जायसवाल ने हिन्द अस्पताल की आयुष्मान भारत, पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजनाओं की सफलता पर चर्चा की। कहा कि शीघ्र ही इसमें एमपी, एमएलए योजना लागू होगी। संस्थान अध्यक्ष प्रो आमोद सचान व चेयरपर्सन डॉ ऋचा मिश्रा ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह संस्थान में हाल ही से गुर्दा प्रत्यारोपण सुविधा शुरू हो जायेगी। यह संस्थान लाभ कमाने की सोच पर नहीं चल रहा है। इसी का नतीजा है कि प्रदेश में निजी मेडिकल कॉलेजों में पहला स्थान हासिल कर चुका है। इससे पूर्व प्राचार्य प्रो दीपक मालवीय, निश्चेतन विभाग प्रमुख प्रो अर्चना अग्रवाल, प्रो राजीव लखोटिया, प्रो आरबी सिंह,प्रो आरआर सिंह डॉ राखी गुप्ता ने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर डॉ एसएनएस यादव, अमित श्रीवास्तव, निशात नसर आदि शामिल रहे।

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