लखनऊ से आये वैज्ञानिको ने आम उत्पादको को उकठा रोग के लक्षण एव बचाव की जानकारी दी

अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी

मसौली बाराबंकी। केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रहमान खेड़ा लखनऊ से आये वैज्ञानिको ने आम उत्पादको को उकठा रोग के लक्षण एव बचाव की जानकारी देते रोकथाम के तरिके बताये।
बताते चले कि वर्तमान समय मे तेजी से फैल रहे उकठ
रोग का खतरा तेजी से बढ रहा है. इसकी वजह से आम की पैदावार पर भी असर पड़ने लगा है क्षेत्र के ग्राम भयारा, बड़ागांव, बांसा, टेरासानी, रहरामऊ, बिन्दौरा, रोटीगाव आम की बागो के लिए जाना जाता है इन दिनों उकठा रोग के चलते हजारों की संख्या में पेड़ सूखने लगे हैं. इस रोग के चलते आम के बागों पर एक बड़ा खतरा मंडराने लगा है जिसको लेकर फल उत्पादक किसान परेशान हैं. इस बीमारी की रोकथाम के लिए मंगलवार को केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रहमान खेड़ा से आये आम वैज्ञानिक डा0 प्रभात कुमार शुक्ला ने उकठ रोग के रोकथाम के लिए कई तरीके बताये उन्होंने सलाह दी है कि किसान गहरी जुताई के समय आम के पेड़ की जड़ों को क्षतिग्रस्त होने की दशा में कॉपर सल्फेट या कॉपर ऑक्सिक्लोराइड से पुताई कर दें. यह बीमारी एक पेड़ से दूसरे पेड़ में भी तेजी से फैलती है. इस बीमारी का वाहक फफूंद होता है उन्होंने बताया कि
उकठा रोग अधिक वर्षा और जलभराव की स्थिति में आम के बागों में फफूंद द्वारा उत्पन्न होता है पहला लक्षण पत्तियों के मुरझाने के रूप में सामने आता है. इसमें 1 से 2 सप्ताह में पेड़ की सारी पत्तियां सूख जाती हैं. इस फफूंद से संक्रमित पेड़ के तने के अंदर का संक्रमण पाया जाता है जिससे लकड़ी का रंग गहरा भूरा या काला हो जाता है. इस फफूंद का संक्रमण जड़ों से तनो में बढ़ता है. इस रोग से मरते हुए पेड़ों की गंध से स्कोलिटिड बीटल नाम का कीट आकर्षित होता है. यह कीट छाल में बारीक छेद बनाते हुए अंदर लकड़ी तक घुस जाता है कि तथा तने के बाहर निकाला गया महीन बुरादा इस रोग के फैलाव में सहायक होता है. रोग से मरते हुए पेड़ों के मुख्य तने और शाखाओं पर गोंद का रिसाव भी होता है।
फ़सल सम्भाग सुरक्षा के अध्यक्ष डा0 दीपक सिंह ने उकठा रोग के नियंत्रण के उपाय बताते हुए कहा कि जड़ के आसपास की मृदा में 50 से 150 ग्राम थायोफेनेट मिथाइल या कार्बेंडाजिम मिलाकर सिंचाई करनी चाहिए. बागों में प्रोपिकोना जोल एक मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करना चाहिए तथा क्लोरोपायरी फ़ास 20 ई.सी के 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव से तुरंत नियंत्रण पाया जा सकता है. वर्तमान समय में आम की बागो में इसके लक्षण देखे जा रहे हैं उन्होंने बताया कि आम के बागों में गहरी जुताई के समय जड़े कट जाती हैं जिसके जरिए फफूँद का संक्रमण शुरू होता है संक्रमित टहनियों के सूखे भाग से करीब 10 से 20 सेंटीमीटर नीचे से काटने के बाद मोटी डालियों पर कॉपर ऑक्सिक्लोराइड के .5% के घोल से पुताई और कॉपर ऑक्सिक्लोराइड या कॉपर हाइड्रोक्साइड .3% का छिड़काव करना चाहिए।
इस मौक़े पर बागवान अलीम किदवाई, यासिर आराफात किदवाई, अहमद सईद किदवाई, हुसैन किदवाई, हंसराज
सैफ किदवाई, मुन्ना खान, अकरम खान, मुनीर खान, शकील , शंभू यादव आदि लोग मौजूद रहे।

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