बदायूं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा निर्देशन में तहसील दातागंज में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया पी एल वी रामवीर शर्मा ने बताया कि भारतीय संसद ने साल 1985 में नशीले पदार्थों को बेचने, बनाने और सेवन को लेकर नारकोटिक्स ड्रग्स साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट 1985 ( NDPS) पारित किया था. नारकोटिक्स का अर्थ नींद से है और साइकोट्रोपिक का अर्थ उन पदार्थों से है जो दिमाग पर असर डालते हैं. कुछ ड्रग और पदार्थ ऐसे हैं जिनका उत्पादन और कारोबार जरूरी है, लेकिन किसी को भी एक सीमा और नियमों के भीतर ही रहकर ये सब करने की मंजूरी है. सरकार इन सब गतिविधियों को एनडीपीएस एक्ट के तहत नियंत्रित करती है.नारकोटिक के तहत चरस, गांजा, अफीम, हेरोइन, कोकेन, मॉर्फीन जैसे पदार्थ आते हैं. वहीं, साइकोट्रोपिक के तहत एलएसडी, एमएमडीए, अल्प्राजोलम यानी केमिकल को मिलाकर बनाए जाने वाले पदार्थ आते हैं. एनडीपीएस एक्ट 1985 की धारा 41 के अंतर्गत सरकार को नशीली दवा का सेवन करने वाले की पहचान, इलाज और पुनर्वास केंद्र की
स्थापना का अधिकार है. धारा 42 के तहत जांच अधिकारी को बगैर किसी वारंट या अधिकार पत्र के तलाशी लेने, मादक पदार्थ जब्त करने और गिरफ्तार करने का भी अधिकार है
उपस्थित पी एल वी प्रीती सिंह मुनेंद्र पाल रामवीर शर्मा तहसीलदार रविन्द्र प्रताप सिंह आदि उपस्थित रहे।
*मुकीम अहमद अंसारी बदायूं*

