मेरा मुफ़्त सुझाव, अमेरिकी अधिकारी किताब पढ़ें, अगर वे किताब पढ़ते तो ईरानी राष्ट्र को कभी खोखली धमकी न देतेः अब्बास मूसवी
समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ
विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि कोई भी प्रस्ताव ईरान को अंतरिक्ष में सेटेलाइट भेजने से मना नहीं करता और अमेरिका का यह दावा पूरी तरह वास्तविकता के खिलाफ है कि ईरान का यह क़दम सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2231 का उल्लंघन है।
विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि अमेरिकी अधिकारियों को किताब पढ़ना चाहिये। सैयद अब्बास मूसवी ने अमेरिकी अधिकारियों को किताब पढ़ने की सिफारिश करते हुए कहा है कि अगर अमेरिकी अधिकारी कहानी कि किताबों के अलावा वैश्विक मामलों के बारे में किताब पढ़ते तो महान ईरानी राष्ट्र को खोखली धमकी न देते।
सैयद अब्बास मूसवी ने गुरूवार की रात्रि को अंतरराष्ट्रीय पुस्तक दिवस की ओर संकेत किया और ट्वीट किया कि आज किताब का अंतरराष्ट्रीय दिवस है और अमेरिकी अधिकारियों को मेरा मुफ्त सुझाव यह है कि वे किताब पढ़ें।
उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी अधिकारी कहानियों के अलावा अंतरराष्ट्रीय मामलों के बारे में किताबें पढ़ते तो महान ईरान राष्ट्र को खोखली धमकी न देते और अमेरिका की विदेश नीति को युद्धोन्मादी लोगों के हवाले न करते।
इसी प्रकार अब्बास मूसवी ने कहा कि ज्ञान और तकनीक में प्रगति ईरानी राष्ट्र का कानूनी अधिकार है और नूर सेटेलाइट को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए और प्रतिरक्षा नीति के परिप्रेक्ष्य में अंतरिक्ष में भेजा गया है।
विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने नूर सेटेलाइट के अंतरिक्ष में भेजे जाने पर अमेरिका और इस्राईल के हस्तक्षेप पर आधारित बयानों की ओर संकेत किया और कहा कि कोई भी प्रस्ताव ईरान को अंतरिक्ष में सेटेलाइट भेजने से मना नहीं करता और अमेरिका का यह दावा पूरी तरह वास्तविकता के खिलाफ है कि ईरान का यह क़दम सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2231 का उल्लंघन है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका ने परमाणु समझौते से निकल कर न केवल सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2231 का उल्लंघन किया है बल्कि दूसरे स्वतंत्र देशों पर भी दबाव डाल रहा है कि वे भी इस प्रस्ताव का उल्लंघन करें।
उन्होंने कहा कि नूर सेटेलाइट के अंतरिक्ष में भेजे जाने पर जर्मनी चिंता जता रहा है जबकि इस देश के रक्षा मंत्री ने ऐसे युद्धक विमान ख़रीदे जाने की इच्छा जताई और संचार माध्यमों में बयान किया जो परमाणु बमों को ले जाने में सक्षम हों।
विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस प्रकार की दोहरी नीति क्षेत्र, यूरोप और विश्व की शांति व सुरक्षा के लिए ख़तरा है।

