डीएम साहब! बन्दरों के आतंक घरों में कैद है बचपन! शहर के आजाद नगर वासी बन्दरों से परेशान होकर कर रहे हैं वैकल्पिक व्यवस्था नगर पालिका प्रशासन और वन विभाग बेखबर
शमीम अंसारी बाराबंकी (ईएमएस)। 05 मार्च 2025 । 2025
बाराबंकी। शहर में इस समय बंदरों का आतंक बढ़ गया है, गली गली झुण्ड के रूप में आपको दिखाई पड़ जायेंगे लेकिन नगर पालिका प्रशासन को यह बन्दर दिखाई नहीं दे रहे हैं। बन्दरों के डर से मासूम बच्चे घरों में कैद हो गये हैं, इनका बचपन अब चारदीवारी में व्यतीत हो रहा है। यहां के बन्दर इतने खूंखार हो गये हैं कि भगाने से भागते भी नहीं हैं और उल्टे काटने के लिए दौड़ पड़ते हैं।
मालूम हो कि नगर पालिका परिषद के वार्ड आजाद नगर के लोगों के दिलों में बन्दरों का इतना खौफ हो गया है कि लोग इनसे बचाव के लिए भारी भरकम धनराशि खर्च करके वैकल्पिक व्यवस्था कर रहे हैं लेकिन गरीब लोगों को इनसे छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि इस समय बन्दर कमरे में घुस जाते हैं खाद्य सामग्री के साथ-साथ कपड़े, जूते मोजे तक उठा ले जाते हैं। अगर कपड़े सुखाने के लिए धूप में डाल दो तो बन्दर कपड़े फाड़ देते हैं। वहीं कई घरों की महिलाएं भी बन्दरों के हमले से चोटहिल हो चुकी हैं। बच्चे डर के मारे घर के बाहर खेलने भी नहीं निकल पा रहे हैं ऐसे में अपना बचपन चार दिवारी में ही कैद होकर रह गया है। ज्यादातर बन्दर उपभोक्ताओं के बिजली के तारों पर लटक कर उनको तोड़ देते हैं, जिससे लोगों को घोर परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।
बंदरों के आतंक निरंतर बढ़ने से लोग परेशान हैं। नगर पालिका प्रशासन से बार-बार लोग बंदरों से छुटकारा दिलाने की मांग करते रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं हो रहा है। निरंतर बढ़ रही बंदरों की संख्या के कारण लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए है। बंदरों से बचने के लिए लोग हजारों रुपए खर्च करके लोहे के जाल लगवा रहे हैं। बंदर हर रोज वार्ड में बच्चों, बुजुर्गों, राहगीरों महिलाओं को काट रहे हैं। वार्डों के लोगों ने कहा कि नगर पालिका प्रशासन को चाहिए कि वह बंदरों को पकड़वा कर इनके आतंक से छुटकारा दिलाए। गलियों में निकलना हुआ मुश्किल हो गया है, बंदरों की टोलियां घरों में घुस कर घर में रखा सामान उठा कर ले जाती हैं। बंदरों के डर से गलियों में, छतों पर बच्चे नहीं खेलते हैं। महिलाएं भी छतों पर कपड़े सुखाने के बाद उनकी रखवाली करती हुई नजर आती हैं। बंदर छतों पर सूखने वाले कपड़े ले जाते हैं। घरों के आगे बंदरों के आतंक से बचने के लिए जाल हजारों रुपए खर्च करके लोग लगवा रहे हैं। पानी की टंकी लोगों के तोड़ रहे हैं।
बंदरों का आतंक इतना है कि गली से राहगीर अकेले नहीं जा सकता है। गलियों की दीवार पर बंदर टोलियों के साथ बैठे रहते हैं। बंदर हर रोज किसी किसी मोहल्ले में बच्चों, राहगीरों, महिलाओं को काट रहे हैं। कई बार नगर पालिका से बंदरों से छुटकारा दिलाने की मांग कर चुके हैं लेकिन समाधान नहीं हो रहा है। लोग इस कदर सहमे हुए हैं कि छोटे बच्चों को अकेले स्कूल भेजना बंद कर दिया है। हमलावर बंदरों ने कई लोगों को अपना शिकार बनाया है। लोगों का कहना है कि बंदर जंगल के अलावा आस-पास की आबादी में भी रहते हैं। यहां से उन्हें भोजन की प्राप्ति होती है। इसी सिलसिले में वह इधर-उधर भटकते हैं। भोजन न मिलने की वजह से वह चिड़चिड़े होकर हमलावर हो जाते हैं। इस सम्बंध में वन विभाग के डीएफओ को फोन किया गया तो उनका फोन नहीं उठा।शमीम अंसारी बाराबंकी (ईएमएस)। 05 मार्च 2025 । 2025

