आशाओं की कमीशनखोरी के चलते जच्चा-बच्चा की जान को बढ़ रहा है खतरा , आशाओ को जच्चा बच्चा केंद्र संचालकों द्वारा दिए गए कूपन पर अवैध सेंटरों पर हो रहे हैं प्रशव,
मुकीम अहमद अंसारी ब्यूरो चीफ एसएम न्युज 24 टाइम्स बदायूं
स्थानीय स्वास्थ्य विभाग मौन आशाओं एवं जच्चा बच्चा केंद्र संचालकों की हो रही है बल्ले बल्ले,
सहसवान, बदायूं। भारत सरकार द्वारा ग्रामीण अंचल में नवजात शिशु एवं प्रसुताओं की बढ़ रही मृत्यु दर को रोकने के उद्देश्य से ग्रामीण अंचल एवं नगरों में गर्भवती महिलाओं व उनके शिशुओं के स्वास्थ्य पर नजर रखना वी स्वास्थ्य केदो पर सरकार द्वारा दी जा रही व्यवस्थाओं को जागरूक करके गर्भवती महिलाओं को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाकर उन्हें उच्च कोटि की स्वास्थ्य सेवा से लाभान्वित कराना था साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केदो पर आने वाली गर्भवती महिलाओं को उनके स्वास्थ्य खान-पान के लिए भी सरकार द्वारा एक निश्चित राशि उनके खातों में भेजने के भी इंतजाम किए गए परंतु स्थानीय आशाओं द्वारा गर्भवती महिलाओं ( जिनके प्रशव होने हैं )कोआशा कार्यकर्ता कमीशनखोरी के चक्कर में नवजात शिशुओं और उनकी माताओं की जान के लिए खतरा बन गई है।

जबकि सरकारी अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद, मोटी कमीशन के लालच में आशाएं गर्भवती महिलाओं को अवैध निजी जच्चा बच्चा चिकित्सा केंद्रों पर प्रसव कराने के लिए के लिए मजबूर कर रही हैं। वह स्वयं तो अवैध रूप से संचालित जच्चा बच्चा केंद्रों पर ना जाकर उन्हें जच्चा बच्चा केंद्रों के प्रबंधकों द्वारा दिए गए कूपन, टोकन, पर्ची, पर महिला का नाम लिखकर यह कहते हुए भेजा जाता है कि अगर यह कूपन टोकन पर्ची जब लेकर जाओगी तो आपको उपरोक्त स्वास्थ्य केंद्र पर अच्छी सुविधा मिलेगी बेचारे भोले भाले ग्रामों के लोग उनके मीठी मीठी बातों में फंसकर अभेद रूप से संचालित जच्चा बच्चा केंद्र पर पहुंच जाते हैं जहां उन्हें सुविधाओं के नाम पर ठेंगा दिखाते हुए तरह-तरह से गर्भवती महिलाओं के प्रसव की भ्रामक जानकारी देकर उन्हें गुमराह किया जाता है कि ऐसा करने से जच्चा के स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा वैसा करने से बच्चों के स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा ऐसा वैसा जैसा दिखाकर उनसे हजारों रुपए हड़प लेते हैं और अशिक्षित लोगों के हाथों प्रसव कराते हैं अगर प्रसव सफल हो गया तू जच्चा बच्चा केंद्र की बल्ले बल्ले उसे दंपत्ति द्वारा मिठाई के रूप में और भुगतान किया जाता है और प्रसव असफल होने पर उसे तत्काल सुविधा ना होने की जानकारी देकर हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी जाती है इसी सलाह के चलते बीते 2 सालों में सहसवान नगर एवं देहात क्षेत्र में पांच दर्जन से ज्यादा अवैध रूप से संचालित जच्चा बच्चा केंद्र में नव जात शिशुओं एवं प्रसुताओं की मौत हो चुकी है परंतु स्वास्थ्य विभाग द्वारा किसी भी अवैध रूप से संचालित जच्चा बच्चा केंद्र संचालकों के विरुद्ध एक भी रिपोर्ट दर्ज नहीं नहीं कराई जबकि 13 जून को राजकीय पशु चिकित्सालय के निकट मुख्य मार्ग पर बिना किसी बोर्ड के अवैध रूप से संचालित जच्चा बच्चा केंद्र में जच्चा बच्चा की हुई मृत्यु के बाद केंद्र पर परिजनों द्वारा किए जा रहे हंगामा को देखकर मौके पर पहुंची थाना कोतवाली पुलिस ने बड़ी सूझबूझ का परिचय देते हुए आनंद-फानन में मृतकों के शव को सील करके पीएम को भेज दिया चर्चा है जच्चा बच्चा केंद्र संचालक के गुर्गों द्वारा एवं मृतकों के परिजनों से सौदेबाजी करने का सिलसिला भी प्रारंभ हो गया चर्चा है यही कारण है कि जच्चा बच्चा मृतक के परिजनों द्वारा कोई भी प्रार्थना पत्र थाना कोतवाली को नहीं दिया गया पुलिस ने पंचायत नामा भरकर जच्चा बच्चा मृतकों के शब को सील करके पीएम को भेज दिया । मामला जिला मुख्यालय पर जब जनपद स्तरीय अधिकारियों पर समाचार पत्र एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया व सोशल मीडिया के माध्यम से जब तो स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने अपनी चुप्पी तोड़ी और आनंन-फानन में नोडल अधिकारी आरोपी अवैध रूप से संचालित जच्चा बच्चा केंद्र पर पहुंचे जहां मोहल्ले वासियों ने उन्हें सब कुछ बता दिया उसके बाद उन्होंने केंद्र के संचालक सौरभ वर्मा से भी मोबाइल पर बात की और जच्चा बच्चा केंद्र संचालित करने के अभिलेख मांगे केंद्र संचालक सौरभ वर्मा ने जब अपने चाचा बच्चा केंद्र संचालित करने के मोबाइल पर अभिलेख नोडल अधिकारी को भेजें तो इसमें कोई भी ऐसा अभिलेख उपलब्ध नहीं था जिसमें स्वास्थ्य विभाग द्वारा जच्चा बच्चा केंद्र संचालित करने की अनुमति प्रदान की गई हो स्वास्थ्य विभाग द्वारा जच्चा बच्चा की मोतो का जिम्मेदार जच्चा बच्चा केंद्र संचालक सौरभ वर्मा के विरुद्ध नोडल अधिकारी चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर प्रशांत त्यागी ने थाना कोतवाली सहसवान में अवैध रूप से जच्चा बच्चा केंद्र संचालित करने का अपराध पंजीकृत कर दिया। जबकि इससे पूर्व नगर के मोहल्ला सैफुल्लागंज में स्वास्थ्य विभाग से रिटायर एक स्वास्थ्य कर्मचारी महिला द्वारा अवैध रूप से जच्चा बच्चा केंद्र संचालित किया जा रहा है चर्चा यह भी है कि उपरोक्त केंद्र पर अवैध रूप के गर्भपात भी किए जाते हैं जिनसे लाखों रुपए की वसूली की जाती है उपरोक्त जच्चा बच्चा केंद्र में प्रसव करना तो आम बात है यहां भी बीते माह एक प्रसूता की प्रसव के दौरान मौत हो गई थी परिजनो ने हंगामा किया परिजन मृतक प्रसूता को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे जहां उन्होंने मौत का जिम्मेदार अवैध रूप से जच्चा बच्चा केंद्र संचालित कर रही संचालिका पर लगाते हुए जमकर हंगामा किया ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ बलराम यादव ने तत्काल एक मेमो बनाकर थाना कोतवाली भेज दिया जहां मेमो मिलते ही सक्रिय हुई थाना कोतवाली पुलिस भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंच गई और मृतक प्रसूता के शव को कब्जे में ले लिया तथा पीएम के लिए पंचायतनामा भरना शुरू कर दिया इसी बीच चर्चा है परिवार के ही कुछ लोगों एवं जच्चा बच्चा केंद्र संचालिका के मध्य हुई सौदेबाजी के चलते मृतका के परिजनों ने पीएम कराने से इनकार कर दिया परिजनों के इनकार करने पर पुलिस ने भी अपने हाथ पीछे खींच लिए अब सवाल पैदा होता है क्या स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं थी कि वह आरोपी जच्चा बच्चा केंद्र पर जाकर घटनाक्रम की जांच करें परंतु ऐसा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा नहीं किया गया इससे टोल नंबर चार पर संचालित एक जच्चा बच्चा केंद्र पर भी एक प्रसूता की मौत हो गई जच्चा बच्चा केंद्र संचालक एवं मृतक प्रसूता के परिजनों द्वारा हुई सौदेबाजी के चलते मामला टॉय टॉय फिश हो गया क्या स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं थी कि वह मौके पर टीम भेज कर जच्चा बच्चा केंद्र की जांच करता परंतु जिम्मेदार स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने उपरोक्त स्वास्थ्य केंद्र पर भी जाना उचित नहीं समझा इससे पूर्व भी सहसवान बिसौली
नाधा तीराहे पर स्थित एक जच्चा बच्चा केंद्र पर भी जच्चा बच्चा की मृत्यु हो गई मौके पर पहुंचे परिजनों ने स्वास्थ्य केंद्र पर जमकर हंगामा किया एवं मारपीट की मौके पर थाना कोतवाली पुलिस पहुंच गई जैसे तैसे मृतक के परिजनों के चांगल से स्टाफ कर्मचारियों को व मुश्किल बचाया चर्चा है इस मामले में भी मृतका का पति जच्चा बच्चा केंद्र संचालक के विरुद्ध अपराध पंजीकृत करना चाहता था परंतु मृत का के मायके वालों द्वारा जच्चा बच्चा केंद्र संचालक से आर्थिक समझौता करके मामला टॉय टॉय फिश कर दिया गया। क्या वहां भी स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को पहुंचकर जच्चा बच्चा केंद्र संचालक के विरुद्ध कार्यवाही नहीं करनी थी परंतु ऐसा नहीं हुआ आखिर क्यों,,,,,,,,,,,,,
इधर नगर के अकबराबाद मोहल्ले से हरदत्तपुर मार्ग पर स्थित एक अवैध रूप से संचालित जच्चा बच्चा केंद्र पर भी स्टाफ कर्मचारियों को लेकर दिनदहाड़े ताबड़तोड़ गोली चली जिसमें एक बेकसूर दूधिया मारा परंतु मामला समाचार पत्रों में प्रकाशित होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग का एक भी कर्मचारी मामले की जांच करने मौके पर नहीं पहुंचा आखिर ऐसा कौन सा कारण है की नगर एवं देहात क्षेत्र में तरह-तरह की तकनीकी ग्राहकों को लुभाने वाले स्वास्थ्य केंद्र पर नारे लिखकर बड़े-बड़े होर्डिंग लगाकर जच्चा बच्चा केंद्र संचालित हो रहे हैं जिसमें नगर के मात्र चार पंजीकृत जच्चा बच्चा केंद्रों को छोड़ दिया जाए तुम नगर में एवं देहात क्षेत्र में पांच दर्जन से ज्यादा जच्चा बच्चा केंद्र स्वास्थ्य विभाग के लाभकारियों के संरक्षण में पल पोस रहे हैं परंतु स्वास्थ्य विभाग पूर्ण रूप से आंखें मूंदे बैठा हुआ अपनी तिजोरी भरने में लगा हुआ है। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी चिकित्सा अधीक्षक द्वारा 13 जून को राजकीय पशु चिकित्सालय के निकट जच्चा बच्चा की हुई मृत्यु के आरोपी जच्चा बच्चा केंद्र संचालक के विरुद्ध ही क्यों अपराध पंजीकृत कराया गया इससे पहले भी कई जच्चा बच्चा केदो पर प्रसूता एवं नवजात शिशुओं की मौत हो चुकी हैं परंतु विभाग द्वारा आरोपी जच्चा बच्चा केंद्र संचालकों के विरुद्ध अपराध पंजीकृत न कराए जाने का मामला लोगों पचा नहीं पा रहे हैं कह रहे हैं कि आखिर कुछ ना कुछ तो दाल में काला है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सहसवान में कई आशा कार्यकर्ता सरकारी अस्पतालों के बजाय उन निजी नर्सिंग होम या अवैध क्लिनिकों से सांठगांठ किए हुए हैं, जहां उन्हें प्रत्येक डिलीवरी पर बड़ा कमीशन मिलता है। ये आशाएं गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को सरकारी अस्पतालों की कमियों और निजी सेंटरों की तथाकथित “बेहतर सुविधाओं” का हवाला देकर गुमराह करती हैं।
परिणामस्वरूप, कई महिलाएं ऐसे अप्रशिक्षित या कम सुविधाओं वाले केंद्रों पर डिलीवरी कराने को मजबूर होती हैं, जहां जच्चा और बच्चा दोनों की जान को गंभीर खतरा होता है। अक्सर इन अवैध केंद्रों पर प्रशिक्षित स्टाफ, आपातकालीन सुविधाएं और जीवन रक्षक उपकरण मौजूद नहीं होते, जिससे जटिलताओं की स्थिति में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं, फिर भी अनदेखी:
यह स्थिति तब और भी चिंताजनक हो जाती है जब यह देखा जाता है कि सहसवान के सरकारी अस्पताल में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए पर्याप्त और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां प्रशिक्षित डॉक्टर, नर्सें, मुफ्त दवाएं और आवश्यक उपकरण मौजूद हैं, जिनका उद्देश्य सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करना है। इसके बावजूद, कमीशन के खेल में ये सुविधाएं उपेक्षित हो रही हैं।
इस गंभीर मसले पर स्थानीय प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन को इस कमीशनखोरी के रैकेट पर तत्काल लगाम लगाये जाने और दोषी आशा कार्यकर्ताओं व अवैध चिकित्सा केंद्रों कार्यवाही की जाने के लिए नगर एवं देहात क्षेत्र की जनता संयुक्त रूप से एक पत्र मुख्यमंत्री को भेज कर नगर एवं देहात क्षेत्र में संचालित अवैध जच्चा बच्चा केंद्रों के विरुद्ध कार्यवाही किए जाने तथा इस कार्य में लिप्त आशा कार्यकर्ता की कार्य प्रणाली की भी जांच कराई जाने की मांग की है ।
मुकीम अहमद अंसारी ब्यूरो चीफ एसएम न्युज 24 टाइम्स बदायूं

