बच्चों को अपने बीच पाकर परिजनो की आँखें छलक पड़ी हरियाणा से पैदल गांव पहुचे मजदूर
मामुन अंसारी संवाददाता बाराबंकी
त्रिलोकपुर बाराबंकी। ’बुलाते हैं हमें मेहनत-कशों के हाथ के छाले’ ’चलो मुहताज के मुँह में निवाला रख दिया जाए’ जी हां हम बात कर रहे है हरियाणा से पैदल चलकर आये मजदूरों की जिनके पैरो में छाले है, भूख से डगमगाते कदमो से शुक्रवार को अपने घर त्रिलोकपुर पहुचे तो परिजन फफक कर रो पड़े। थाना मसौली के कस्बा त्रिलोकपुर के रहने वाले अमन पुत्र सुशील हलवाई, शिवपूजन पुत्र संतोष मौर्या, ललित मौर्या पुत्र रामनरेश, किशन पुत्र कमलेश, विष्णु पुत्र राकेश, ने बताया कि वह लोग हरियाणा के जिला रेवाड़ी गांव के एसलवाश कंपनी उनकेमण्ड में काम करने गए थे। लॉक डाउन में बुरी तरह फंस गए जो पैसा कमाया सब खर्च हो गया किराया तक नही बचा। मजदूर युवको ने बताया कि 4 मई की रात हम लोग हरियाणा से पैदल निकल आये। रास्ते मे जंहा पुलिस खड़ी मिलती रास्ता बदल कर खेत के रास्ते निकल आते इस तरह चार दिन रात चलकर कानपुर पहुच कर एक वाहन से लखनऊ पहुचे यहां से फिर पैदल निकल लिए। दोपहर दो बजे बरबंकी पहुच कर परिजनों को बुलाकर कर गांव पहुचे युवको के परिजनों ने सबसे पहले रामनगर सीएचसी को सूचना दी। सभी मजदूर युवको को गांव के लोगो ने भरपेट खाना खिलाया। डरे सहमे युवको को हरसंभव मदद का भरोषा दिलाते हुए उन्हें कवारेन्टीन पर जाने को समझाया।
मामुन अंसारी संवाददाता बाराबंकी

