नगर पालिका परिसर में शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन पूर्व मंत्री आबिद रजा और पालिकाध्यक्ष फात्मा रजा ने किया शिक्षकों का सम्मान
मुकीम अहमद अंसारी
बदायूँ। नगर पालिका परिसर में शुक्रवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर भव्य शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में विभिन्न शिक्षकों को सम्मानित किया गया। पालिका परिसर में शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर रहे पूर्व मंत्री आबिद रज़ा, विशिष्ट अतिथि चेयरमैन फात्मा रज़ा व कार्यक्रम की अध्यक्षता सीनियर प्राचार्य गुलफाम सिंह यादव जी ने की तथा आदित्य यादव के प्रतिनिधि अनिल जी की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री आबिद रजा ने कहा कि शिक्षक समाज में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षकों का दायित्व केवल विद्यार्थियों को पढ़ाना ही नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित करना भी है।
उन्होंने कहा कि देश की तरक्की में शिक्षकों का बहुत बड़ा योगदान है। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ मानवता और आपसी भाईचारे का संदेश दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में मजहब और बिरादरी के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, बल्कि इंसानियत की राजनीति होनी चाहिए। तभी देश सही मायने में तरक्की कर सकेगा।
पालिकाध्यक्ष फात्मा रजा ने कहा कि वह शिक्षकों का बहुत सम्मान करती हैं। आज वह जिस मुकाम पर हैं, उसमें शिक्षा और शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने शिक्षक सम्मान समारोह में उनके आह्वान पर पहुंचे सभी शिक्षकों का तहेदिल से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के सम्मान में उनकी ओर से किसी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री आबिद रजा और पालिकाध्यक्ष फात्मा रजा ने शिक्षक दिवस के संस्थापक एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण कर किया।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे गुलफाम सिंह यादव ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा व्यवस्था के सामने नई चुनौतियां हैं। तकनीकी बदलाव, इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों ने बच्चों के लिए ज्ञान के नए रास्ते खोले हैं, लेकिन इसके साथ भ्रम और गलत जानकारी की चुनौती भी बढ़ी है। शिक्षकों को बच्चों को जानकारी देने के साथ ही विवेक का इस्तेमाल करना भी सिखाना चाहिए, ताकि वे सही जानकारी को पहचानकर उसका सकारात्मक उपयोग कर सकें।
सेवानिवृत्त शिक्षक राजीव राज ने कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा बेहद समृद्ध रही है। यहां ज्ञान को केवल रोजगार का माध्यम नहीं माना गया, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण विकास से जोड़कर देखा गया। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में भी ऐसे तत्वों को अपनाने की जरूरत है, जो विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनने में मदद करें।
सेवानिवृत्त शिक्षक अनवार उद्दीन ने कहा कि शिक्षक समाज के सबसे सम्मानित वर्गों में शामिल हैं। शिक्षक अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय बच्चों के भविष्य को संवारने में लगाते हैं। कई बार उनके योगदान का तत्काल परिणाम दिखाई नहीं देता, लेकिन वर्षों बाद जब उनके पढ़ाए विद्यार्थी अपने क्षेत्र में सफलता हासिल करते हैं तो शिक्षक की मेहनत सार्थक होती है।
समारोह में प्रोफेसर कमला माहेश्वरी, मास्टर जमील, आचार्य प्रताप सिंह, ममता नौगरिया, प्राचार्या सुषमा कथूरिया, पूर्व प्राचार्य खिजर साहब, पूर्व प्राचार्य सुबुर साहब, प्राचार्य गिन्दो देवी, सेवानिवृत्त एच.एफ. चंद्र, सेवानिवृत्त मजहर शब्बीर, सेवानिवृत्त मोहम्मद मियां, सीमा यादव, शहनाज बानो, कन्हैया लाल, मार्क्स नजम, वेदमित्र आर्य आदि ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।
*मुकीम अहमद अंसारी ब्यूरो चीफ एसएम न्युज 24 टाइम्स बदायूं*

