के बी हिंदी सेवा न्यास के बैनर तले कीर्तिशेष श्याम बहादुर सक्सेना की पुण्य तिथि की स्मृति में काव्य गोष्टी आयोजित की गई।
मुकीम अहमद अंसारी
बिसौली,बदायूं। के.बी. हिंदी सेवा न्यास के बैनर तले कीर्तिशेष श्याम बहादुर सक्सेना की पुण्य तिथि की स्मृति में काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। जिसकी अध्यक्षता डॉ. सतीश चन्द्र शर्मा ‘सुधांशु’ ने की। संचालन युवा कवि राजीव कुमार उपाध्याय ने किया। विष्णु असावा ने सुनाया जर्जर काया बूढ़ी माँ की, घर में टूटी खटिया पर। चार-चार बेटे हैं फिर भी, उसे भरोसा लठिया पर। गजलकार ओजस्वी जौहरी ‘सरल’ ने पढ़ा- क से लेकर ज्ञ तक का हमें ज्ञान कराती है हिंदी। सात सुरों की सरगम का भी भान कराती है हिंदी। डॉ.सतीश चन्द्र शर्मा ‘सुधांशु’ ने सुनाया सरसता का स्रोत हिंदी। सरलता से प्रोत हिंदी। शिष्टता का कर रही संचार भाषा हिन्द की। उद्धार भाषा हिन्द की। विजय कुमार सक्सेना ‘विजय’ ने सुनाया हजारों साए दुनियाँ में मगर ऐसा नहीं कोई, पिता के नाम के साए की जो भर दे जगह कोई। संचालन कर रहे राजीव उपाध्याय ने सुनाया भाषा के उद्यान में, हिंदी अनुपम भाषा। शुद्ध सरल वक़्तव्य में, है सबके अति पास। रमेश मिश्र ‘सहज’ ने कहा माँ से उद्भव पाकर मैंने, ज़ब अपना मुँह खोला। हिंदी के माध्यम से पहला अक्षर ही माँ बोला। अशोक कुमार दुबे ने कहा न जानूँ आराधना, रखूँ न पूजा थाल। अक्षर की लड़ियाँ बना, मात बनाती माल। नरेंद्र पाठक ‘अभाषित’ ने सुनाया हिंदी मैं हिन्द देश की भाषा हूँ स्वदेशी। निज देश में पली बढ़ी नहीं हूँ विदेशी। विजय सक्सेना ने अपने शिक्षक पिता स्व. श्याम बहादुर सक्सेना की स्मृति में नगर के सेवानिवृत्त पांच शिक्षकों को शाल, प्रतीक चिन्ह व पुस्तकें प्रदान कर सम्मानित किया।
*मुकीम अहमद अंसारी ब्यूरो चीफ एसएम न्युज 24 टाइम्स बदायूं*

