बाराबंकी। ‘अब दास्तां है ख़त्म ये उसका गुमान है। हर आदमी के मुंह में हमारी ज़बान है।।’ आज़र बाराबंकी का यह शेर आज के हालात को बयां करता है। उन्होंने हमेशा गरीबों, जरूरतमंदों की खिदमत की। नगर पालिका परिषद के सदस्य रहते हुए पूरी ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वाहन किया।
यह बात प्रसिद्ध शायर एवं वरिष्ठ अधिवक्ता स्व. सैय्यद मकासिद हुसैन रिज़वी उर्फ आजर बाराबंकवी की छठी बरसी पर गांधी भवन में आयोजित स्मृति सभा की अध्यक्षता कर रहे जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष बृजेश दीक्षित ने कही। इस दौरान स्व. सैय्यद मकासिद हुसैन रिज़वी उर्फ आजर बाराबंकवी के चित्र पर माल्र्यापण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। समाजवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने कहा कि स्व. मकासिद हुसैन फौजदारी के अच्छे वकील ही बड़े शायर भी थे। उनकी रचनाएं कई पत्रिकाओं में प्रकाशित होती थी।
जिला बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष मो. अमीन ने कहा कि स्व. सैय्यद मकासिद हुसैन रिज़वी मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता हुमायूं नईम खान ने किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से चैधरी काशिफ, निशात अहमद एडवोकेट, हिसाल बारी किदवई, राजेश निगम, आसिफ हुसैन, हसनैन हैदर, दानिश सिद्दीकी, मो. सबाह, रिजवान रज़ा, नदीम अब्बास, कपिल सिंह यादव सहित कई लोगों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
शमीम अंसारी बाराबंकी: एसएम न्यूज24टाइम्स

