ईरान की ईंट से ईंट बजा देने की धमकी देने वाले ट्रम्प आजकल तेहरान पर इतने वारी सदक़े क्यों?
समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ
ईरान ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के नए परमाणु समझौते के लिए दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।
तेहरान ने दो टूक लफ़्ज़ों में कह दिया है कि जो कुछ अमरीकियों ने बिगाड़ा है, उसे सही करने की ज़िम्मेदारी भी उनकी है।
दर असल पिछले हफ़्ते अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने एक अमरीकी सैनिक के ईरान की जेल से आज़ाद होकर अमरीका पहुंचने के अवसर पर ट्वीट करके ईरान का शुक्रिया अदा किया था।उन्होंने ईरान का शुक्रिया अदा करते हुए लिखाः अमरीका में होने वाले चुनाव के बाद बड़ा समझौता करने का इंतज़ार न करें। मैं चुनाव जीतने जा रहा हूं, आप अभी एक बेहतर समझौता कर सकते हैं।
अमरीका समेत विश्व की 6 बड़ी शक्तियों ने 2015 में ईरान के साथ परमाणु समझौता किया था, जिसके तहत ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना था और बदले में ईरान पर लगे प्रतिबंधों को समाप्त किया जाना था। लेकिन 2018 में ट्रम्प ने इस समझौते को एक बुरा समझौता बताते हुए एकपक्षीय रूप से इससे निकलने का एलान कर दिया।ट्रम्प प्रशासन ने ईरान पर सख़्त आर्थिक प्रतिबंध लगाते हुए दावा किया था कि वह एक दिन ईरान को झुकने और नया समझौते करने पर मजबूर कर देंगे।इस साल नवम्बर में अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं। चुनाव से ठीक पहले घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ ऐसी घटनाएं घटी हैं, जिससे ट्रम्प की लोकप्रियता अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।
फ़िलिस्तीन-इस्राईल मुद्दे के समाधान के लिए ट्रम्प की तथाकथित डील आफ़ द सेंचरी का वक़्त से पहले ही जनाज़ा निकल गया। जनरवरी में आईआरजीसी के वरिष्ठ कमांडर जनरल क़ासिम सुलेमानी की बग़दाद एयरपोर्ट के निकट हत्या करने का ट्रम्प का फ़ैसला भी अमरीका को काफ़ी भारी पड़ा, क्योंकि ईरान ने जवाबी कार्यवाही करते हुए इराक़ स्थित अमरीकी सैन्य अड्डे पर क़रीब 8 बैलिस्टिक मिसाइल दाग़े और इस सैन्य अड्डे को बुरी तरह से तबाह कर दिया।उसके बाद चीन से शुरू होने वाली कोरोना वायरस महामारी को ट्रम्प ने गंभीरता से नहीं लिया, यहां तक कि अमरीका इस महामारी से प्रभावित होने वाला विश्व में पहला देश बन गया। चीन और यूरोपीय देशों से आर्थिक रिश्तों में तनाव के बीच महामारी ने अमरीकी अर्थव्यवस्था को भारी नुक़सान पहुंचाया और लाखों युवक बेरोज़गार होकर रोड पर आ गए।मई के आख़िर में अमरीकी पुलिस अधिकारियों के हाथों एक निहत्थे काले नागरिक की बेरहमी से हत्या के वीडियो फ़ुटेज ने ट्रम्प के ताबूत में आख़िरी कील ठोंक दी और पूरा अमरीका भेदभाव की आग और ट्रम्प की भड़काऊ बयानबाज़ी से जल उठा।
दिल दहला देने वाली इस घटना का विरोध अमरीकी सीमाओं से निकलकर अब विश्व भर में फैल चुका है और दुनिया के बड़े बड़े शहरों में लोग इस भेदभाव के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ उठा रहे हैं, जो हर रोज़ कालों और अल्पसंख्यकों को गोरे अधिकारोयों के हाथों झेलना पड़ता है।ट्रम्प ने इस घटना से राजनीतिक लाभ उठाने का भरपूर प्रयास किया, लेकिन लगता है बाज़ी उलट गई है और इसका लाभ उनके डेमोक्रेट प्रतिद्वंद्वी जो बाइडन को मिलता दिख रहा है।अमरीका में प्रदर्शनकारी कोरोना वायरस महामारी की परवाह किए बग़ैर सड़कों पर निकल रहे हैं और ट्रम्प की नीतियों की निंदा कर रहे हैं। सीएनएन द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण के नतीजों के मुताबिक़, पिछले महीने ट्रम्प की लोकप्रियता में कम से कम 7 अंकों कमी आई है, जबकि बाइडन का समर्थन अब तक के अपने उच्चतम स्तर पर है।
इस तरह की रिपोर्टों से ट्रम्प के पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गई है और वह चुनाव से पहले कुछ ऐसा करने के चक्कर में हैं, जिससे बाज़ी पलट जाए। ईरान को एक बार फिर वार्ता का प्रस्ताव, इसी मक़सद से दिया गया है, लेकिन शायद वह यह भूल रहे हैं कि ईरानी नेतृत्व ने इतनी कच्ची गोलियां नहीं खेली हैं कि वह ट्रम्प के हाथों का खिलौना बन जाएगा।

