*कोरोना ने जहां आम आदमी की आर्थिक हालत खराब हो चुकी है वहीं इस विपदा में जिला प्रशासन ने गत ढाई माह में 18 हजार से ज्यादा निर्दोष लोगों के वाहनों का चालान कर गरीब जनता की कमर तोड़ दी है।*
मोहम्मद मोईद सिटी रिपोर्टर बाराबंकी
बाराबंकी राष्ट्रव्यापी संकट कोरोना महामारी अर्थात बीमारी में जो मौतें हुई सो हुई या फिर कोई कोरोना पॉजिटिव निकलकर निर्धारित समयावधि के लिए क्वॉरेंटाइन हुआ यह सब तो धरा का धरा रहा लेकिन इसी के बराबर बराबर जन सामान्य पर चले सरकारी चाबुक ने बरबस ही इंसानियत को इतनी बुरी तरह छलनी किया जिसकी भरपाई निकट भविष्य में नामुमकिन सी प्रतीत होती है और फिर जान बचाने के नाम पर जानमाल पर अत्याचार कहां का न्याय है बात आम आदमी की समझ के बाहर है भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन एवं ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाड के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद वसीम राईन का यह दर्द आज खबर नवीसो से बातचीत के दौरान आज अनायास ही छलका उन्होंने कहा कि बड़े ही दुर्भाग्य का विषय है कि कोरोना महामारी के दौरान जनता की मदद के बजाय उनकी पीड़ा बढ़ाने के कार्य अधिक मात्रा में सामने आए हैं उन्होंने बताया कि माह मार्च में 3219 वाहनों का चालान किया गया माह अप्रैल में 6398 वाहनों का चालान कर 36 वाहनों को सीज किया गया इस दरमियान जब जनता का संकट और बड़ा तो माह मई में 8135 वाहनों का चालान करने के साथ-साथ 61 वाहनों को सीज किया गया वही महामारी अधिनियम के तहत 160 केस दर्ज कर 180 लोगों को गिरफ्तार किया गया हद तो यह कि एनडीपीएस एक्ट के तहत फर्जी बरामदगी दिखाकर मार्च में 14 अप्रैल में 48 और मई में 22 निर्दोषों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया जनपद का बहुचर्चित केस बांसा निवासी नसरुद्दीन का है जिनको मसौली पुलिस ने घर से बुलाकर फर्जी तौर पर उनके पास से 150 ग्राम मार्फिन की बरामदगी दिखाकर उनको सलाखों के पीछे पहुंचा दिया जिसको लेकर भाजपा के सांसद एवं विधायकों ने आक्रोश जताते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर जांच की मांग भी उठाई इसी तरह नाबालिग छात्र मोहम्मद जुनेद को बाराबंकी से पकड़कर जैदपुर में अवैध रूप से निरुद्ध रखा गया बाद में उसके पास से 300 ग्राम मार्फिन की बरामदगी दिखाकर उसका चालान कर दिया गया जबकि बेगुनाह जुनैद के पिता ने पत्र प्रेषित कर गिरफ्तारी टीम में शामिल पुलिस वालों के मोबाइल लोकेशन चेक करने की उच्च अधिकारियों से गुहार भी लगाई थी एक और ह्रदय विदारक मामला यह भी कि मसौली के ही बासा निवासी फतेह खान को भी घर से बुलाकर तीन सौ ग्राम मार्फिन दिखाकर फर्जी तरीके से जेल भेजा गया जिसको लेकर फतेह खान की मां ने मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र देकर विशेष जांच की मांग की थी नेताद्वय ले मांग की कि जिस प्रकार उच्चतम न्यायालय ने प्रवासी मजदूरों के वाद समाप्त कर दिए हैं उसी प्रकार कोरोना महामारी अधिनियम व मोटर वाहन अधिनियम के सभी मुकदमे समाप्त किए जाएं और चालान करना बंद किया जाए इसके अलावा एनडीपीएस एक्ट में निरूद्ध लोगों के लिए एक विशेष जांच कमेटी बनाकर साक्ष्य वा सबूतों के आधार पर उनके वाद समाप्त किए जाएं तथा दोषी पुलिसकर्मियों पर वाद दर्ज करके मार्फिन कहां से लाकर दिखाई गई की भी जांच की जाए अन्यथा मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया जाएगा यहाँ श्री सुमन ने विशेष तौर पर कहा कि लोक कल्याणकारी राज्य में इस तरह की कार्रवाईया लोकतंत्र को शर्मिंदा करती हैं जबकि श्री वसीम ने कहा कि बांसा निवासी नसरुद्दीन पसमांदा मुस्लिम महाज के जिलाध्यक्ष है और उनकी पत्नी पिछले पंचायती चुनाव में गांव में प्रधान पद की प्रत्याशी रह चुकी हैं जो कुछ मतों से पिछड़ गई थी सच तो यह है कि कोरोना महामारी के दौरान नसरुद्दीन और उनकी पत्नी ने गरीब व्यक्तियों की आर्थिक रूप से भरपूर मदद की थी उनकी उभरती छवि को धूमिल करने के लिए विपक्षियों ने पुलिस से मिलकर नसरुद्दीन की गिरफ्तारी कराई थी जिसको लेकर ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज पूरे प्रदेश में आंदोलन चलाएगा उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि अविलंब घटना की जांच कराकर कर दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कारवाई की जाए
मोहम्मद मोइद सिटी रिपोर्टर बाराबंकी

