हाई कोर्ट की पाबंदी के बाद भी लगाये जा रहे ब्लेड युक्त तार पशुओं के लिये घातक, अधिकारी कर रहे अनदेखी

शमीम अंसारी बाराबंकी: एसएम न्यूज24टाइम्स .

बाराबंकी। फसलो को आवारा पशुओं से बचाने के लिए लगने वाले तारो में ब्लेड युक्त तार के प्रयोग पर हाई कोर्ट की पाबंदी के बाद भी जीवो के लिए घातक साबित होने वाले ब्लेड युक्त तार लगाये जा रहे है ओर शासन प्रशासन की अनदेखी के कारण हाई कोर्ट के आदेश को किसानों द्वारा हवा में उड़ाया जा रहा हैं। बताते चलें कि योगी सरकार में गोवंशीय पशुओ की खरीद फरोख्त में लगी पाबन्दी के कारण पूरे प्रदेश में आवारा पशुओं की भरमार है। किसान फसलो को बचाने के लिए जहाँ रात दिन खेतो में पहरा दे रहे है वही तमाम किसान खेतो के चारो ओर कंटीले एव ब्लेड युक्त तारो की बाड़ लगा रहे है लेकिन फसलो की सुरक्षा के लिए लगने वाला ब्लेड तार जानलेवा साबित हो रहे हैं। आये दिन तारों की चपेट में आकर आवारा मवेशी लहूलुहान हो रहे हैं। क्षेत्र में ब्लेड तार से आवारा पशुओं के जख्मी होने के कई मामले सामने आ चुके है। फसलों को बचाने के लिए किसानों ने खेतों की तारबंदी कर रखी है। कंटीले तारों के साथ किसान कम कीमत पर बाजार में उपलब्ध ब्लेड तार का उपयोग कर रहे है। जबकि यह तार इतना ज्यादा खतरनाक है कि इसको छूते ही चीरा लग जाता है। यहीं कारण है कि अवारा घूम रहे हजारों गौवंश इन तारों की चपेट में आकर आए दिन लहूलुहान हो रहे है।

ब्लेड युक्त तार पर हाईकोर्ट की है पाबन्दी


फसलो की सुरक्षा में लगने कंटीले तारो के आलावा अब ज्यादातर किसान ब्लेड युक्त तार का प्रयोग कर रहे है जबकि कोर्ट ने भारतीय दंड प्रक्रिया नियमावली 1973 की धारा 144 के तहत इन कांटेनुमा व ब्लेड वाली तार की बाड़ लगाने पर प्रतिबंध लगा रखा है तथा खेतों में लगाई गई बाड़ को हटाने के आदेश भी दिये गये है के परन्तु खुले आम ब्लेड युक्त तारो की बिक्री होने के कारण किसान बेफिक्र होकर खेतो के चारो ओर तार की बाड़ लगा रहे है जबकि स्पष्ट निर्देश है कि आदेशों की अवहेलना करने वालों पर भारतीय दंड की धारा 188 के तहत व वन्य जीव एक्ट 1972 व पशु क्रूरता 1960 के तहत सजा का प्रावधान है।

 

जख्मी पशुओ का नही हो रहा उपचार


कंटीले एव ब्लेड युक्त तारो से जख्मी होने वाले पशुओ के उपचार के लिए पशुपालन विभाग को जिम्मेदारी दी है परन्तु विभाग की लापरवाही एव अनदेखी के कारण क्षेत्र में तमाम जख्मी पशु कराह रहे है जिसका कारण है कि इन पशुओ की दशा की जानकारी पशुपालन विभाग को कौन दे। इस सम्बन्ध सी वी ओ डॉ0 मार्केंडेय सिंह से जानकारी ली गयी तो उन्होंने बताया कि ब्लेड युक्त पूरी तरह प्रतिंबधित है जिसे खेत में बाड़ के रूप में नही लगाया जा सकता है। खेतो एव सड़को पर घूमने वाले पशुओ को गौआश्रय स्थलों में रखा जा रहा तथा घायल पशुओ के इलाज स्थानीय पशु चिकित्सको को दी गयी है।शमीम अंसारी बाराबंकी: एसएम न्यूज24टाइम्स .

 

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