बाद में न पड़े पछताना,वोट करने जरूर जाना, सही प्रत्याशी चुनना।

शादाब अली की रिपोर्ट

उन्नाव ये सियासत का स्याह चेहरा है। हर बार सपने दिखाती है और फिर उसे पूरा करने से पहले ही तोड़ देती है। सियासतदानों की बेवफाई से हर बार खुद को छला सा महसूस कर रहे मतदाताओं के चेहरे पर गुस्सा वाजिब भी है शाम होते ही चुनावी चौपाल सजाई,जाती है तो शाम को कॉलोनी में मतदाताओं से रूबरू हुआ। मतदाताओं के चेहरे पर गुस्सा दिखाई दिया। जुबां पर नेताओं के खिलाफ आक्रोश था, तो आंखें सियासत से मिली बेवफाई की ओर साफ इशारा कर रही थीं। बातें शुरू हुईं, तो एक-एक कर मतदाताओं ने कमियां गिनाईं। किसी ने नेताओं के वादों को झूठा करार दिया, तो कोई बोला, हमने कभी अपना कोई जनप्रतिनिधि नहीं देखा वह कॉलोनी है, जहां नालियां चोक हैं। स्ट्रीट लाइट तक बदलवाने के लिए मतदाताओं को कई-कई दिन तक धक्के खाने पड़ते हैं। साफ पानी का इंतजार करना पड़ता भी है। जाहिर है, मतदाताओं के जेहन में हजारों सवाल होंगे,जो गुस्से के रूप में जुबां पर आ गए। किसी ने कहा कि ये नेता चुनाव जीतते हैं और फिर अपने वादे भूल जाते हैं। लेकिन हां, इस नाराजगी के बीच सुनहरे लोकतंत्र के लिए जो खुशी की बात है, वह ये कि इस बार मतदान करने से परहेज नहीं करेंगे। वो भी इसलिए कि उनके मतदान न करने से गलत व्यक्ति चुना जाएगा और उन्हें पूरे पांच साल पछताना होगा। बैंक कॉलोनी में प्रमुख समस्या ही नाली चोक होने की है। यहां तो कभी कोई जनप्रतिनिधि चुनाव के बाद झांकने तक नहीं आया। मतदाता कहते हैं कि इस बार तो कोई वोट मांगने भी नहीं आएगा ऐसा लगता है कि जैसे हमारे गली मोहल्ले से बाहर है। न सड़क हैं और न ही पानी। मतदाता कहते हैं कि जब कोई यहां आए तो हम अपनी बात सुनाएं।

क्या कहते हैं मतदाता
हम लापरवाही में वोट डालने नहीं जाते। इसका फायदा उठाकर गलत लोग जीत जाते हैं। इससे नुकसान सीधे हमारा ही होता है। इस बार हर काम छोड़कर हमें मतदान करना है।

जितने नेता आज तक दिखे, गाँव मोहल्ले से लेकर कालोनीयो में कोई नहीं दिखा। कहने को केवल बिजली आती है। पानी में कोई सुधार नहीं, केंद्रीय योजनाओं का क्रियांवयन ठीक से नहीं हो पा रहा है। ऐसे में अच्छा जनप्रतिनिधि चुनने को हमें तो मतदान करना ही है।

कहीं गांव मोहल्ले में आज भी हैंडपंप सूखे पड़े हैं तो कहीं उखड़े पड़े हैं का पानी बंद है। जो जीतकर जाते हैं, वह कभी लौटकर नहीं आते। आखिर हम कैसे नेताओं के वादे पर विश्वास करें। इस बार जनप्रतिनिधि चुनने में गलती नहीं करेंगे। वादों को परखेंगे तब चुनेंगे।

महिलाओं की सुरक्षा के प्रति भी गंभीर होना चाहिए। हमें बाहर निकलने में डर लगता है। फॉगिंग तक नहीं हो रही है। इससे घरों में मच्छर परेशान कर रहे हैं। हम इस बार उसे ही चुनेंगे, जो हमारी समस्या का समाधान करेगा। प्रतिभा जैन अब तक जनप्रतिनिधियों ने हमें छला है। जब हम सही व्यक्ति को वोट देंगे, तभी सही का चुनाव होगा। पिछली बार मेरे बच्चों को फीवर था, फिर भी वोट डालने गई। इस बार सही गलत देखकर ही मतदान करूंगी।
वोट कीमती है, इसलिए जरूरी है कि हम उसका सही उपयोग करें। यदि हम अपने मत का सदुपयोग नहीं करेंगे, तो निश्चित ही कोई अयोग्य उस पद पर बैठेगा। पूरे पांच साल हमारा ही नुकसान करेगा। इसलिए इस बार पिज्जा बर्गर जरूर खाएं, लेकिन वोट डालने भी जाएं।

अब बारी है मतदाताओं की। हमें अपने मत से जनप्रतिनिधि चुनना है, तो क्यों न ऐसे व्यक्ति को चुनें, जो हमारे बारे में भी सोचे। समस्याओं का समाधान जो करेगा, उसी को हमारा मत मिलेगा।

सबसे बड़ी समस्या स्वास्थ्य योजनाओं की है। सरकारें योजनाएं बनाती है, लेकिन निचले स्तर पर वह क्रियांवित नहीं होतीं। बच्चों को जो टीकाकरण मुफ्त होना चाहिए, उसके भी दो से तीन हजार रुपये देने पड़ रहे हैं। इसलिए ऐसे जनप्रतिनिधि का हमें चुनाव करना है, जो सरकार की योजनाएं हर व्यक्ति तक पहुंचाए।
जो करेगा हमारी बात,हम सुनेंगे उनकी बात
चुनाव के बाद यह पछतावा न हो कि गलत प्रत्याशी चुनकर आ जाए, ऐसे में हमारी नैतिक जिम्मेदारी बन जाती है कि अपने मताधिकार का प्रयोग जरूर करें। यह बात
चौपाल में निकलकर आई। चौपाल में उपस्थित लोगों ने कहा कि ऐसा प्रत्याशी चुनना चाहिए, जो विकास के बारे में बात करे। सबने कहा कि चुनाव मैदान में स्थानीय प्रत्याशी ही उतारे जाने चाहिए। वह क्षेत्र की समस्या जानते हैं और लोगों से उनका जुड़ाव होता है।

यह है लोगों के मुद्दे

हाईवे के साथ शहर के अंदर की सड़कें भी सही हों।

हर गाँव मे शौचालय की समस्या है। इस का निस्तारण किया जाए।

स्कूलों की मनमानी पर रोक लगे। सरकारी स्कूलों की हालत सुधरे।

स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति सुधरे। लोगों को सस्ता इलाज मिल सके।

सफाई व्यवस्था पर काम हुआ है, लेकिन अभी और जरूरत है।

आम आदमी नेता से केवल अपने क्षेत्र के विकास की उम्मीद करता है। ऐसे में जो भी जीते वह लोगों के साथ तालमेल बनाकर रखे। जीतने के बाद नेता अपने को वीआइपी न समझें।

हमें अपने मताधिकार का सही इस्तेमाल करना चाहिए। जनता अगर अपने वोट का महत्व समझ जाएगी तो नेताओं को भी क्षेत्र में काम करना पडे़गा।

गाँव शहर के विकास के लिए सही व्यक्ति को वोट देना चाहिए। सही व्यक्ति को चुनना जनता की जिम्मेदारी है। अपने वोट की कीमत पहचानें।

जीते, वह बस इतना ध्यान रखें कि जनता के कारण ही वह जीते हैं, अगर जनता का काम नहीं किया तो अगली बार जनता उन्हें गद्दी से हटा भी सकती है।

सभी लोगों को मतदान में भाग लेना चाहिए। अक्सर देखा जाता है कि लोग बाद में कहते हैं कि सही व्यक्ति नहीं जीता। ऐसे में जो सही है, उसे ही चुनें।

राष्ट्रीय मुद्दों के साथ स्थानीय मुद्दे भी प्रत्याशियों की सूची में होने चाहिए। जो भी जीते वह अपने वादों को पूरा करे।

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