परमिट की आड़ में उजाड़ी जा रही आम की बाग विभाग की मिली भगत से वन माफियाओ के हौसले बुलन्द
नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)
त्रिलोकपुर बाराबंकी। उद्यान विभाग ने रोग ग्रस्त और फलविहीन रिपोर्ट लगाकर कम उम्र के फलदार आम के दरख्तों का बिना मौके की जांच किये धड़ल्ले से परमिट जारी करवा रहा है। इस फेहरिस्त में रानीबाजार रेंज के गगियापुर गांव में 42 आम के पेड़ों की बाग में उद्द्यान विभाग की रिपोर्ट के बाद वन विभाग ने परमिट जारी करके एक और फलदार बाग काट डाला। रविवार को कोतवाली फतेहपुर और मसौली थाने के बॉर्डर पर स्थित गांव गगियापुर में बेखौफ हरियाली मिटाई गयी। यही नही परमिट के आड़ में ठेकेदार अवैध रूप से भी पेड़ काट रहे है। इस बाग में कम उम्र के करीब 42 फलदार आम के पेड़ लगे है जिसे काट डाला गया। इस बाग से महज 7 पेड़ो का परमिट जारी किया गया सभी को रोग ग्रस्त और फल विहीन बताया गया । इस बाबत गांव के लोगो ने बताया कि पिछले साल इस पूरी बाग आम से लदी थी। इस बबात ठेकेदार ने बताया कि रिपोर्ट लगाने के लिए जो पैसा पड़ता उसे देकर दफ्तर में ही रिपोर्ट लगवा लिया। इस तरह तेजी से पेड़ काटने का परमिट जारी होने से पर्यावरण प्रेमी दुखी है।
क्या है परमिट का नियम
वन विभाग की मानें तो वह पेड़ो को तीन प्रजाति रखता है। छूट प्रजाति, प्रतिबंधित व अतिरिक्त प्रजाति। छूट प्रजाति में बबूल, यूकेलिप्टस, जामुन, लास, पेपर आदि आती है जिन्हे काटने के लिए परमिट की आवश्यकता नही होती। प्रतिबंधित प्रजाति में आम, महुआ, नीम, पीपल, बरगद, पाकर, साल (साखू) आती है जिनको काटने के लिए विशेष परिस्थितियों में ही वन विभाग परमिट देता है। इन दोनों के अलावा शीशम, सागौन आदि कुछ पेड़ है जो अतिरिक्त प्रजाति के हैं जिन्हे काटने के लिए वन विभाग परमिट देता हैं। फलदार वृक्ष आम को काटने की परमिट विभाग तभी देता है जब वह उद्यान विभाग से उसके अनुपयोगी होने की जांच करा कर रिपोर्ट प्राप्त कर लेता है। ठेकेदारों के मुताबिक दोनो विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों को खुश करना पड़ता है। इसके बाद वही से रिपोर्ट लग जाती है। इस बबात डीएफ ने बताया कि उद्द्यान विभाग की रिपोर्ट पर ही परमिट जारी किए जाते है। गगियापुर मामले की जांच कराई जाएगी।
नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)

