भगवान तो बस भाव के ही भूखे है…. श्रीमद् भागवत कथा में बोले कथावचाक

सैफ़ अली संवाददाता थाना हैदरगढ़ की रिपोर्टर

हैदरगढ़, बाराबंकी। क्षेत्र के गौरा गांव में आयोजित श्रीमद भागवत कथा सप्ताह के अंतिम दिन कथा श्रवण के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। इस दौरान भजन कीर्तन भी आयोजित हुए। जिन पर श्रद्धालु जमकर थिरके। कथा वाचक ने कहा कि दीन दुखियों की मदद दुनिया का सबसे बड़ा पुण्य है। कथावाचक पंडित श्री आशीष कृष्ण शास्त्री ने कहा भगवान श्री नारायन समस्त संसार के कष्ट, शोक का हरण कर लेते है, बस आवश्यकता है सच्चे भाव से उन्हे पुकारने की। भगवान तो बस भाव के ही भूखे है। भाव से यदि कोई उन्हे स्मरण मात्र कर ले तो वह स्वयं भक्त के लिए तत्पर रहते है। द्वारिका के नाथ श्रीकृष्ण ने जब यह सुना कि उनके बचपन का सखा सुदामा उनसे मिलने आया है तो अपनी सुधि बुध भूलकर अपने मित्र को गले लगाकर रोने लगे। सुदामा की दीन दशा पर प्रभु स्वयं विलाप करने लगे और प्रसन्न होकर सुदामा द्वारा लाए हुए चावल को खाकर एक-एक लोक देने लगे। इस मध्य भागवताचार्य ने कृष्ण-सुदामा की मित्रता और सुदामा चरित्र के वृतांत को मार्मिक ढंग से सुनाया तो श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गई। इस दौरान प्रधान हरीश चंद्र रावत पवन कुमार तिवारी, सत्यप्रकाश शुक्ला, एडवोकेट शिवम मिश्रा, एडवोकेट आदर्श तिवारी, शिवांशु मिश्रा, कुलदीप शाश्त्री, पंडित पंकज शास्त्री सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण आदि मौजूद रहे।

 

सैफ़ अली संवाददाता थाना हैदरगढ़ की रिपोर्टर

 

Don`t copy text!