हर मखलूक को खुदा ने इंसान के लिए बनाया है इंसान को मखलूकात  के लिए नहीं- मौलाना उरूजुल हसन “मीसम”

नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)7268941211

सितारों में  अपना मुसतक़्बिल ढूँढने के बजाय उस दर पर आयें जहाँ  सितारे अपना मुसतक़्बिल बनाने आते है

बशक्ले इंसानी में खुदाई के काम अंजाम देने वाला ही विलायत का मालिक होता है

अली के इरफ़ान,फ़रमान वअरमान पर अमल करने अली के सच्चे शीया बनो

बाराबंकी ।जनपद के क़स्बा ज़ैदपुर स्थित इमामबाड़ा बड़ी सर्कार्मे मरहूमा राकिया बानो बिन्ते तक़्लीद हुसैन के चालीसवें की मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना उरूजुल हसन “मीसम” ने कहा अली के इरफ़ान , फ़रमान व अरमान पर अमल करने अली के सच्चे शीया बनो ।बशक्ले इंसानी में खुदाई के काम अंजाम देने वाला ही विलायत का मालिक होता है । हर मखलूक को खुदा ने इंसान के लिए बनाया है इंसान को मखलूकात  के लिए नहीं ।सितारों में  अपना मुसतक़्बिल ढूँढने के बजाय उस दर पर आयें जहाँ  सितारे अपना मुसतक़्बिल बनाने आते है ।आखिर में कर्बला वालों के मसायब पेश किए जिसे सुनकर सभी रोने लगे ।मजलिस से पहले डा 0रज़ा मौरान्वी ने अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुए पढ़ा-  कर्बला में जंग की हिकमत बदल दी शाह ने , खन्जरों  के सामने सूखी ज़बाँ ले आए हैं । अजमल किन्तूरी ने पढ़ा-भर लिया मश्के सकीना को जरी ने लेकिन ,खुश्क इतनी थी कि दरिया की नमी चीख उठी ।मक्की ज़ैदपुरी ने पढ़ा-कुछ काम की येआह नहीं वाह नहीं ,इरशाद ए खुदा से कौन आगाह नहीं । कसरत हो कि किल्लत हो मजलिस में कभी ,नाहक है जो कुरबत अन इलल्लाह नहीं ।आरिज़ जर्गान्वी ने पढ़ा- शहर बानो आपके नूरे नजर की बात क्या  , गैर मुमकिन को भी मुमकिन कर दिया सज्जाद ने।मेहदी नक़वी बाराबंकवी ने पढ़ा- कोई आबिद ना जहां में तेरा जैसा पाया , मैंने तुझसे ही इबादत का सलीका पाया ।हाजी सरवर अली कर्बलाई ने अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुए पढ़ा-बैयत  को  मौत  आ  गई  कर्बो बला के बाद । अपना  यज़ीद  ए  वख्त भी  बिस्तर समेट ले ।मीसम अब्बास ने भी नज़रानए अक़ीदत पेश किया ।मौलाना ज़ैगम अब्बास “मुसव्विर “ज़ैदपुरी ने तिलावते कलामे इलाही से मजलिस का आगाज़ किया और निज़ामत के फरायज़ भी अंजाम दिया ।बानिये मजलिस ने सभी का शुक्रिया अदा किया ।नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)7268941211

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