एक क़ौम का सितारा हो गया अल्लाह को प्यारा

हाय मौलाना सैयद सना अब्बास ज़ैदी साहब किबला अभी ज़रूरत थी आपकी हम सबको

बाराबंकी। दिल टूट गया, अश्क आंखों से बेसाख्ता निकल पड़े जब सुना मौलाना सना अब्बास साहब नहीं रहे।अब खाब हो गया उनके मिलने का सलीक़ा ,गुफ़्तुगू का लहजा क्या शाइस्ता अंदाज़,क्या हक़ बयानी, सच्चाई, आलिम बा अमल,होने की बहुत सी मिसालें थी जो दिन पर दिन नई मुलाक़ात में एक रूहानियत का एहसास कराती थी । कई साल आपने कर्बला सिविल लाइंस बाराबंकी में रमज़ान में नूर इस्लामिक मिशन के तहत क्लास लगाए, लोगो को दीन सिखाया,क़ुरआन पढ़ना सिखाया, ये सिलसिला दीन और हम तक पहुँच गया और आप अकबरपुर चले गये । आपके इल्म तक़वा परहेज़गारी से हम सब को और कुछ सीखने को मिलता,यही एक ढारस थी वो भी आज टूट गयी। ऐ रब्बुल करीम ,तूने हमारे बीच से एक बेहतरीन आलिम बा अमल को अपने पास बुला लिया । ये तेरी मर्ज़ी थी इसमें किसी का कोई दखल नही है। बस यही तुझसे फरयाद है उनको जवारे रहमत में जगह देना । मोहम्मद वाले मोहम्मद का वास्ता वाल्दैन,भाई, ज़ौजा और बच्चों को सब्रे जमील अता करना । मोहतरम ज़ुहैर अब्बास चचा आपका बेटा नही गया,अयाज़ सल्लमहु और आरिज़ भय्या आपका चहेता भाई नही गया, मज़हर भाई, अज़हर भाई ,अख्तर भाई आपका भांजा नही गया बल्कि एक क़ौम का सितारा अल्लाह का प्यारा हो गया। जिसकी तकलीफ को हम सब मौला अब्बास और कर्बला वालो के ग़म के आगे सब्र का जामा पहनकर दूर करेंगे । मोमनीन से फ़ातिहा नमाज़े वहशत, क़ुरआन की तिलावत करने की खास इल्तेजा है। चरक हॉस्पिटल लखनऊ में सुबह इंतेक़ाल हो गया था। बाराबंकी में कर्बला सिविल लाइन्स में हुई तदफीन ।

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