सपा के कर्णधारों में जारी है अंदरूनी स्तर पर जड़ खोदो अभियान!
जहरीली जातिगत सोच व जुगाड़ू जातिगत दरबारों से हो रहा है सपा का बंटाधार?
कई गुटबाज ऐसे कि सामने से मिलते हैं गले! पीठ में भोंकते हैं ख़ंजर?

बाराबंकी। कभी समाजवादी पार्टी का दुर्ग कहे जाने वाले बाराबंकी में आज सपा परिवार के रंगबाज गुटबाजों की रंगबाजी ने पार्टी की जड़ों में मट्ठा डालना जारी कर रखा है?हालात यह है कई ऐसे नेता है जो सामने से गले मिलते हैं लेकिन पीठ पीछे खंजर भोंकने में पीछे नहीं रहते! जातिगत सोच एवं जातिगत दरबार समाजवाद की विचारधारा का बंटाधार कर रहे हैं? स्पष्ट है कि समय रहते यदि समाजवादी पार्टी बाराबंकी का ढंग से ऑपरेशन ना हुआ तो यह सपा के लिए खतरनाक साबित होगा। क्योंकि अंदरूनी स्तर पर जारी इस गुटबाजी से पार्टी की 2022 की चुनावी की बाजी फिलहाल कांपती नजर आ रही है?
अति विश्वत सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक समाजवादी पार्टी बाराबंकी के अंदरूनी स्तर पर हालात बहुत अच्छे नहीं है। यहां पर अपने आपको पार्टी का बड़ा नेता मानने वाले कई बड़े नेता अपने- अपने सपनों के महलों को ऊँचा बनाने में जुटे हुए हैं। कोई अपने टिकट के लिए अभी से तैयारी कर रहा है! तो कोई अपने खास दुलारे को टिकट दिलवाने के लिए रणनीति बना रहा है। कुछ पार्टी के बड़े नेता पार्टी आगे बढ़े इसके लिए जान लगाए हुए हैं! तो वहीं कुछ पार्टी के ऐसे भी नेता है जो हम आगे बढ़े फलाँ पीछे हो इसके लिए जान लगाए हुए हैं? जिला पंचायत का चुनाव सामने है। लेकिन समाजवादी पार्टी में वह आक्रमक विपक्ष नजर नहीं आता जिसके लिए यह पार्टी पूरे देश में विख्यात रही है। सूत्रों का दावा है कि अब पार्टी के अंदर कुत्सित जातिवाद की राजनीत हो रही है? फलाँ नेता फलाँ जाति का है। हम हम दूसरी जाति के हैं। हम अपनी जाति के नेता का ही जिंदाबाद लगाएंगे? ऐसी मानसिकता कई बड़े नेता कार्यकर्ताओं तक परोस रहे हैं?अब समाजवादी विचारधारा इस जातिवादी विचारधारा के पीछे नजर आ रही है?
आपसी टकराव के कारण ही पार्टी की हालत पूर्व विधानसभा चुनाव एवं लोकसभा के चुनाव में बद से बदतर हुई है। ऐसा पार्टी के कार्यकर्ता मानते हैं। बाराबंकी में जब पार्टी का राष्ट्रीय स्तर का कोई नेता आता है तब सभी नेता एक दूसरे के साथ ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे यह सभी बिल्कुल एक हैं! लेकिन जैसे ही पार्टी का बड़ा नेता बाराबंकी से प्रस्थान किया इन नेताओं के अंदर उपजे प्रेम के भाव भी प्रस्थान कर जाते हैं? उसके बाद शुरू हो जाता है गला काटो अभियान?? जिले के कई विधानसभा क्षेत्रों में आने वाले 2022 के चुनाव के मद्देनजर अभी से पार्टी के टिकट को लेकर रार प्रारंभ है ।वार पर वार हो रहे हैं। कई दरबारी, कार्यकर्ता व समर्थक तक बोल रहे हैं कि मेरी जाति के नेता को टिकट मिलेगा तभी पार्टी जीतेगी अन्यथा मेरी जाति नाराज हो जाएगी। ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है? इनमें यह भाव नहीं दिखता कि ज्यादा से ज्यादा अच्छे लोगों को पार्टी से जोड़ा जाए एवं पार्टी को 22 की बाजी के जीतने लायक बनाया जाए। पार्टी में जिले के चारों कोनों में अलग-अलग दरबार दिखाई देते हैं? कुछ दरबार ऐसे हैं जहां हर जाति धर्म संप्रदाय के लोग नजर आते हैं। कुछ दरबार ऐसे हैं जहां पर मजबूरी में ऐसी सभी लोगों को बिठाया जाता है? कुछ दरबार ऐसे हैं जहां अपनी जाति लोगों के लिए गलीचे हैं तो दूसरी जाति के लोगों के लिए बस औपचारिकता?
पार्टी के युवा कार्यकर्ता भाजपा सरकार की गलत नीतियों के विरोध में सड़क पर संघर्ष करते दिखाई देते हैं। लेकिन पार्टी के बड़े नेता जिले में आज तक सामुहिक कोई ऐसा बड़ा आंदोलन नहीं खड़ा कर पाए? जिसके लिए सपा जानी जाती है। सूत्रों का दावा है कि पूर्व के विधानसभा चुनाव में पार्टी जिले की कई विधानसभा इसलिए हार गई क्योंकि वहां पर स्वयं सपाइयों की गुटबाजी के चलते भितरघात हुई थी?
समाजवादी पार्टी के लिए जहर यह है कि पार्टी के कई गुटबाज रंगबाज जिले के नेता के पद पर हमारा कब्जा हो? इसके लिए गुटबाजी को धार देने में जुटे हुए हैं! कुछ तो ऐसे नेता भी हैं जो भले ही अपने घरों के वातानुकूलित कमरों को छोड़ना ना चाहते हो लेकिन फिर भी उनका सपना है कि उन्हें बाराबंकी जनपद का सर्वोच्च पार्टी नेता माना जाय।जबकि कई नेता तो ऐसे भी हैं जो पार्टी के द्वारा घोषित कार्यक्रम में ज्ञापन देने तक नहीं जाते? गुटबाजी की हालत यह हैं कि एकजुट समाजवादी पार्टी किसी भी जिला स्तरीय समस्या पर एक साथ खड़ी होकर उसका विरोध करती नजर नहीं आती? यदि कहीं कोई घटना घटी तो सपा के बड़के नेता के साथ चिरपरिचित चेहरे ही साथ खड़े दिखाई देते हैं! अर्थात फलाँ नेता के साथ फलॉ चेहरे एवं फलाँ नेता के साथ फलाँ चेहरे?
सूत्रों का दावा है कि सपा में इस समय एक दो नेताओं को छोड़कर ज्यादातर नेता अपने समकक्ष नेता को निपटाने में जुटे हुए हैं? यहां भाजपा के विरुद्ध आक्रमक रूख कम नजर नहीं आता है! जबकि पार्टी के अंदर अपने विरोधी को निपटाने में ज्यादा?
राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जब अभी हाल ही में बाराबंकी आए थे तब उन्होंने कहा था कि पार्टी को एकजुटता के साथ सभी लोग आगे लेकर चले। और 2022 में पूर्ण बहुमत से समाजवादी पार्टी की सरकार को बनाएं ।उन्होंने यह भी कहा था कि जब बाराबंकी में सपा जीतती है तब उसकी प्रदेश में सरकार बनती है। लेकिन यहां तो हालात एकदम उलट है। बाराबंकी में तो समाजवादी पार्टी अब सवर्ण एवं पिछड़ा तथा दलित के अलग-अलग राग में जा फंसी है? समाजवाद इस जातिवाद पर आंसू बहा रहा है। रंगबाज सपाइयों की रंगबाज गुटबाजी के आगे 22 की बाजी भी काँपती नजर आ रही है? यदि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने बाराबंकी में कोई जोरदार ऑपरेशन ना किया तो पार्टी को आने वाले विधानसभा चुनाव में इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी? जरूरत इस बात की है कि जो नेता पार्टी को आगे ले जा सके। दूसरी पार्टी के लोगों को पार्टी से जोड़ सकें। जो आम जनता में भी लोकप्रिय हो, रणनीतिक हो उसे ही सारे अधिकार दिए जाएं। यहां तो हालात यह है कि कोई राष्ट्रीय अध्यक्ष की नजदीकी के चलते जिले का सर्वशक्तिमान नेता बनना चाहता है? कोई वर्तमान अथवा पूर्व माननीय रहा है तो वह जिले का अगुआ बनना चाहता है? इस प्रकार रंगबाज सपाइयों की रंगबाजी व गुटबाजी के आगे 22 की बाजी फिलहाल हाँफती नजर आ रही है?ये गुटबाजी आगे चलकर कहीं नासूर बन गई तो यह सपा के लिए यह बहुत ही खतरनाक होगा?कृष्ण कुमार द्विवेदी (राजू भैया)

