क्या नए डीजीपी आने के पश्चात पीड़ित को मिल सकेगा न्याय

पत्रकार आशीष सोनी अंबेडकरनगर

अंबेडकरनगर संविधान में हर व्यक्ति को अपनी बात कहने का मौलिक अधिकार है। इसी तरह उत्पीड़न के शिकार व्यक्तियों की फरियाद यदि पुलिस नहीं सुनती है तो उसे न्यायालय में 156 (3) धारा के अंतर्गत अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने का प्रावधान है। कानूनी बाध्यता के कारण पुलिस इन मुकदमों को पंजीकृत भी करती है, लेकिन कुछ समय बाद अधिकांश मामलों में एफआर लगा देती है अंतत्योगत्वा उस व्यक्ति को न्याय नहीं मिल पाता, जिसके कुछ उदाहरण नजीर मात्र हैं।

पीड़ित की आवाज दर-दर भटक रहे गरीब लाचार असहाय और पीड़ित लोग दो कौड़ी के लोग उन्हें थोड़ा सा सपना दिखाकर जो कुछ है उसे भी छीन खा रहे हैं और उम्मीद है अपने कानून पर और विश्वास है अपने लोकतंत्र और संविधान पर परंतु यह सब कहने के लिए है यहां पर किसी को कोई न्याय नहीं मिलता जिसके पास पैसे हैं वही सर्वोपरि है अगर पैसा नहीं तो पैसे वालों के पैरों तले बराबर हैं माननीय मुख्यमंत्री द्वारा बनाए गए 1090 सीएम हेल्पलाइन नंबर अनगिनत रिपोर्ट दर्ज हुई है और थाने में भी दिए गए परंतु आज तक कोई न्याय नहीं मिला इसलिए कैसे भरोसा कर ले कि नए डीजीपी का बदलाव होने पर सभी लोगों की सुनवाई होगी !

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